इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने खिलाफ आए अदालती फैसले को पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक धांधली से बनाई गई अदालत ने सुनाया है, जिसे एक अनिर्वाचित (बिना जनादेश वाली) अंतरिम सरकार ने बनाया और चला रही है।
फैसला राजनीति के इशारे पर लिया गया
अवामी लीग की ओर से जारी बयान में हसीना ने कहा कि यह फैसला एक ऐसी अदालत ने दिया है जिसका मकसद सिर्फ उन्हें और अवामी लीग को खत्म करना है। अदालत ने उन पर पक्षपातपूर्ण तरीके से फैसला सुनाया और सरकार में मौजूद चरमपंथी लोग उन्हें मौत की सजा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका लक्ष्य देश की अंतिम चुनी हुई सरकार (अवामी लीग) को कमजोर करना है।
यूनुस सरकार पर तीखे आरोप
हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉ. मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यूनुस का शासन अराजक, हिंसक और लोकतंत्र-विरोधी है। उनके शासन में पुलिस पीछे हट गई, अपराध बढ़ गए, न्याय व्यवस्था कमजोर हो गई। हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले, महिला अधिकारों का दमन और चरमपंथियों को बढ़ावा मिला। पत्रकारों को जेल भेजा जा रहा है, अर्थव्यवस्था रुक गई है, और यूनुस ने चुनावों में देरी करके अवामी लीग को चुनाव से बाहर कर दिया।
आईसीटी (अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण) पर सवाल
हसीना ने कहा, आईसीटी “अंतरराष्ट्रीय” नाम का इस्तेमाल करता है, लेकिन इसकी कोई अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं है। अदालत ने सिर्फ अवामी लीग के नेताओं पर केस चलाए, जबकि बाकी दलों द्वारा की गई हिंसा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया गया, न ही अपनी पसंद के वकील रखने दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि1971 के युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने वाली इसी अदालत का इस्तेमाल अब उनसे राजनीतिक बदला लेने के लिए किया जा रहा है।
अगर हिम्मत है तो केस ICC ले जाएं
हसीना ने दावा किया कि उन्होंने कई बार अंतरिम सरकार को चुनौती दी कि केस को हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में ले जाएं, लेकिन सरकार ऐसा नहीं करेगी क्योंकि ICC उन्हें बरी कर देगा, और यूनुस सरकार के मानवाधिकार उल्लंघनों की भी जांच शुरू हो जाएगी।
यूनुस पर बेरहमी से विरोध को कुचलने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों, मजदूरों, डॉक्टरों, शिक्षकों, सबके विरोध प्रदर्शनों को निर्दयता से दबाया गया। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई, पत्रकारों को यातनाएं दी गईं। यूनुस की सेना ने कई जगहों पर हत्याएं और हमले किए और उल्टा पीड़ितों पर ही केस दर्ज कर दिया। अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों के घरों और संपत्तियों को जला दिया गया।
मानवाधिकारों पर हमारा रिकॉर्ड बेहतरीन
हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को जगह दी, बिजली–शिक्षा का विस्तार किया, 15 साल में 450% जीडीपी वृद्धि हासिल की, और लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। उन्होंने इन आरोपों को “झूठ” बताया।
अदालत का फैसला: हसीना को मौत की सजा
ढाका की अदालत (आईसीटी-1) ने सोमवार को हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी पाया, और मौत की सजा सुनाई। यह आरोप 2024 के जुलाई अगस्त विद्रोह के दौरान हुई हिंसा से जुड़े हैं। अदालत के अनुसार हसीना, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून और पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल ने हिंसा की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। यह मुकदमा हसीना की अनुपस्थिति में चला। वह वर्तमान में भारत में निर्वासन में हैं, जहां वे सरकार गिरने के बाद भाग गई थीं।

