नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की करीब 61.20 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त (कुर्क) कर ली है। ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में 59.96 करोड़ रुपये की कीमत की 364 प्लॉट और कृषि भूमि शामिल हैं, और 1.24 करोड़ रुपये की बैंक डिपॉजिट और अकाउंट बैलेंस जैसी चल संपत्तियां हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
इससे पहले भी ईडी इस घोटाले में करीब 215 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। ईडी ने बताया कि यह पूरी जांच छत्तीसगढ़ की एंटी करप्शन ब्रांच और इकोनॉमिक ऑफेंस ब्रांच द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की गई थी। इन एजेंसियों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया है कि इस शराब घोटाले से राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। ईडी का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े लोगों ने लगभग 2500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (क्राइम से हुई आय) अर्जित की।
ईडी ने अपने बयान में कहा है कि चैतन्य बघेल इस पूरे शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे। पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे होने की वजह से उन्हें इस सिंडिकेट का मुख्य नियंत्रक और अंतिम निर्णयकर्ता बनाया गया था। सिंडिकेट द्वारा जुटाए गए सभी अवैध पैसों का हिसाब-किताब और उसके इस्तेमाल का जिम्मा भी चैतन्य बघेल के पास था। जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने घोटाले से कमाए गए पैसों को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया और उसे वैध (कानूनी) दिखाने की कोशिश की।
उन्होंने इन पैसों से अपनी कंपनी “बघेल डेवलपर्स” के तहत “विट्ठल ग्रीन” नाम की रियल एस्टेट परियोजना विकसित की। ईडी ने इस साल 8 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले इस केस में ईडी ने कई अन्य बड़े नामों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं, अनिल टुटेजा (पूर्व IAS अधिकारी), अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी (ITS अधिकारी) और कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री और विधायक)। यह मामला अब भी जांच के अधीन है और ईडी आने वाले दिनों में और कार्रवाई कर सकती है।
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