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स्वास्थ्य मंत्रालय ने समोसा-जलेबी पर चेतावनी लेबल के दावों को किया खारिज, कहा- केवल सलाह वाले बोर्ड लगाए जाएंगे

July 15, 2025

स्वास्थ्य मंत्रालय ने समोसा-जलेबी पर चेतावनी लेबल के दावों को किया खारिज, कहा- केवल सलाह वाले बोर्ड लगाए जाएंगे

नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि समोसा, जलेबी, लड्डू जैसे लोकप्रिय भारतीय स्ट्रीट फूड्स पर कोई चेतावनी लेबल लगाने का निर्णय नहीं लिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों को लक्षित करने का कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है और इस परामर्श का उद्देश्य भारतीय स्ट्रीट फ़ूड्स को अलग से निशाना बनाना नहीं है।

क्या है स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कार्यस्थलों पर स्वास्थ्यवर्धक भोजन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए एक सामान्य स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। इसके तहत, कार्यालयों में स्थित लाबी, कैंटीन, कैफेटेरिया और मीटिंग रूम जैसे स्थानों में शैक्षिक बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों का उद्देश्य ज्यादा चीनी और वसा के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना है, जो अक्सर खाद्य पदार्थों में छिपे होते हैं। मंत्रालय ने कहा, “यह सलाह किसी विशेष खाद्य उत्पाद को लक्षित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर भोजन विकल्पों के बारे में जागरूक करना है।”

 

 

स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल

मंत्रालय के अनुसार, इस सलाह का उद्देश्य किसी विशेष खाद्य पदार्थ को केंद्रित करना नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। इसमें शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के सुझाव भी शामिल हैं जैसे सीढ़ियों का उपयोग करना, हल्की-फुल्की टहलने की आदत डालना, और फल, सब्ज़ियां व कम वसा वाले भोजन को प्राथमिकता देना।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए प्रयास

यह सलाह भारत में बढ़ते हृदय रोग, मोटापे, उच्च रक्तचाप और अन्य जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिक तेल और चीनी के सेवन को इन बीमारियों का प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह पहल राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) का हिस्सा है।

नागपुर में शुरुआत

इस अभियान की शुरुआत नागपुर से की जा रही है, और एम्स नागपुर को इस पहल के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। इस योजना के तहत, परिसर के कैफेटेरिया और सार्वजनिक भोजन क्षेत्रों में आसानी से पढ़े जा सकने वाले और चमकीले बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों पर सरल संदेश होंगे ताकि लोग बहुत अधिक चीनी और वसा खाने के स्वास्थ्य जोखिमों को समझ सकें।

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