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‘अब तिरंगा लहरा रहा है, लाल झंडे का युग खत्म’, पीएम मोदी बोले- माओवाद पर भारत की निर्णायक जीत

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि देश अब माओवादी आतंकवाद (नक्सलवाद) से मुक्त होने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पहले लाल झंडे (माओवादियों के प्रतीक) का असर था, आज वहाँ तिरंगा लहरा रहा है। मोदी छत्तीसगढ़ की राजधानी अटल नगर-नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव (25वीं वर्षगांठ) में एक बड़ी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाल ही में कई नक्सलियों ने हथियार डालकर संविधान को स्वीकार किया है, जो देश में बदलते हालात का सबूत है।

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“लाल झंडे की जगह तिरंगे ने ले ली”

प्रधानमंत्री ने कहा, “जिन इलाकों में कभी माओवाद का राज था, वहां अब विकास और शांति लौट रही है। बीजापुर के चिक्कापाली गांव में सात दशक बाद बिजली पहुंची है, अबूझमाड़ के एक गांव में आज़ादी के बाद पहली बार स्कूल बन रहा है। तिरंगे ने लाल झंडे की जगह ले ली है।” उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज की तकलीफों का ज़िक्र करते हुए कहा कि पिछले 55 वर्षों में नक्सलवाद ने प्रदेश को बहुत नुकसान पहुँचाया, और जिन लोगों ने “संविधान और सामाजिक न्याय” की बातें कीं, वे ही राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासियों का शोषण करते रहे।

 

“2014 के बाद लिया माओवाद खत्म करने का संकल्प”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माओवाद के कारण सड़कें, स्कूल, और अस्पताल तक नहीं बन पाए। उन्होने कहा, “शिक्षकों और डॉक्टरों की हत्या कर दी जाती थी। जो लोग सत्ता में थे, उन्होंने कभी इन इलाकों की सुध नहीं ली। लेकिन 2014 में जब हमारी सरकार आई, तो हमने तय किया कि भारत को माओवाद से पूरी तरह मुक्त करना है।”

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आत्मसमर्पण और अब तक की प्रगति

मोदी ने बताया कि “11 साल पहले देश के करीब 150 ज़िले माओवाद से प्रभावित थे, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 3 जिलों तक रह गई है, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर। हाल ही में कांकेर में 20 से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और बस्तर में 200 नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जिन नक्सलियों पर करोड़ों रुपये का इनाम था, वे भी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

“2026 तक माओवादी आतंक का अंत”

केंद्रीय गृह मंत्रालय के हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि 2013 में 126 ज़िले नक्सलवाद से प्रभावित थे, जो अब घटकर 11 ज़िले रह गए हैं। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 31 मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह माओवाद-मुक्त होगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों की कार्रवाई, विकास योजनाओं और पुनर्वास नीति को दिया।

“अब बस्तर में डर नहीं, जश्न है”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज बस्तर में डर नहीं, जश्न का माहौल है। लोग खुश हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अब हिंसा नहीं, विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। आप सोचिए, जब नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, तो छत्तीसगढ़ और देश कितनी तेज़ी से आगे बढ़ेगा।”

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