जम्मू-कश्मीर डेस्क. पूर्व सीएम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोगों को “बंदूक की ताकत” पर राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सरकार की नाकामी है, क्योंकि अगर लोग राष्ट्रगान का सम्मान खुद से नहीं कर रहे तो जबरदस्ती करवाना गलत है।
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उनका यह बयान उस घटना के बाद आया, जब श्रीनगर के टीआरसी फुटबॉल मैदान में राष्ट्रगान के दौरान बैठे रहने पर पुलिस ने करीब 15 युवकों को हिरासत में ले लिया। यह मैच पुलिस शहीद फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल था, जिसमें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद थे। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनके छात्र जीवन में जब राष्ट्रगान बजता था तो सभी छात्र सम्मान में खुद खड़े हो जाते थे। किसी पर दबाव नहीं डाला जाता था।
इधर पकड़े गए युवकों के परिवारों का कहना है कि बैंड की आवाज धीमी और साफ़ नहीं थी, जिस वजह से उन्हें समझ ही नहीं आया कि राष्ट्रगान कब शुरू हुआ।
राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 के अनुसार, जानबूझकर राष्ट्रगान का अनादर करना अपराध है। हालांकि, इस मामले में अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

