इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की वजह से काफी तबाही देखने को मिली है। गुरुवार को भी प्रशासनिक टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा। बचाव कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जो लोग फंसे हैं, उनको निकाला जा रहा है। अभी तक नेपाल के रासुवा जिले में 9 लोगों की मौत होने का मामला सामने आया है।
19 लोगों का फिलहाल सुराग नहीं लग सका है। जिले में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की बात अधिकारियों ने कही है। वहीं, अभी तक 150 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें 127 नागरिक विदेशी हैं, जिनको एयरलिफ्ट करके नेपाल की राजधानी काठमांडू में ले जाया गया है।
09.07.2025#Nepal #Tibet
11 people were missing and 350 were displaced on the Tibetan side,while nine people were killed and 19 were missing in Nepal after floods hit the Gyirong port area,washing away the Friendship Bridge between the two sides and destroying hydroelectric dams. pic.twitter.com/MwIFAimST0— Climate Review (@ClimateRe50366) July 9, 2025
अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली और टेलीफोन सेवाएं बाधित हुई हैं, जिसकी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं। चीन सीमा के निकट टेलीफोन संपर्क बहाल करने और बिजली आपूर्ति को दोबारा शुरू किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस ने भी लापता लोगों की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार अभी 19 लोगों की तलाश की जा रही है। लापता लोगों में 6 नागरिक चीन के हैं, वहीं, 2 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक अभी तक एक मृतक की पहचान हो चुकी है। 8 लोगों के शव काठमांडू स्थित महाराजगंज में त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाए गए हैं। पहचान किए गए शव को परिजनों को सौंप दिया गया है। नेपाल-चीन बॉर्डर पर बाढ़ का कारण हिमनद झील का तटबंध टूटना माना जा रहा है।
हालांकि ज्यादा बारिश से भी प्रशासन ने इनकार किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे बाढ़ आने के सही कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। बिना बारिश के झील का जलस्तर साढ़े 3 मीटर तक बढ़ा है, यह सामान्य बात नहीं है। वहीं, बाढ़ की वजह से कई वाहनों और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। नुकसान का आंकड़ा अधिकारी जुटा रहे हैं।
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