नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ किया है कि अरावली पहाड़ियों की जो नई और विवादित परिभाषा तय की गई है, उसका इस्तेमाल सिर्फ़ खनन से जुड़े मामलों में किया जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि अरावली क्षेत्र को बड़े पैमाने पर खनन के लिए खोल दिया गया है।
कोई भी नई खनन लीज जारी नहीं की जाएगी
उन्होंने बताया कि पूरे अरावली क्षेत्र का आकार करीब 1,43,577 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसमें से सिर्फ 277.89 वर्ग किलोमीटर, यानी लगभग 0.19 प्रतिशत हिस्सा ही खनन के लिए खुला है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जब तक एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन पूरा नहीं हो जाता, तब तक कोई भी नई खनन लीज जारी नहीं की जाएगी।
सरकार ग्रीन अरावली मिशन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए यादव ने कहा कि मोदी सरकार ग्रीन अरावली मिशन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अरावली को किसी भी तरह का बड़ा पर्यावरणीय नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा है कि इस फैसले से खनन कंपनियों को फायदा होगा। पर्यावरण मंत्री ने यह भी बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) एक रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जो भविष्य में खनन से जुड़े फैसलों के लिए जरूरी होगी। हालांकि, मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण उन्होंने इस रिपोर्ट की समय-सीमा बताने से इनकार कर दिया।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक स्थायी खनन योजना (MPSM) तैयार नहीं हो जाती, तब तक कोई नई खनन लीज नहीं दी जाएगी। यह योजना पूरे अरावली क्षेत्र के लिए बनाई जाएगी और इसमें साफ तौर पर बताया जाएगा। किन इलाकों में सीमित खनन हो सकता है। कौन से क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील हैं, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खनन से पर्यावरण पर कितना असर पड़ेगा। खनन के बाद जमीन की बहाली और पुनर्वास कैसे किया जाएगा।
कोर्ट का निर्देश पर्यावरण की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा कवच
सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद अरावली को एक लगातार और सुरक्षित पर्वत श्रृंखला के रूप में बचाए रखना है। इससे भूजल रिचार्ज क्षेत्रों की रक्षा होगी, मरुस्थलीकरण रोका जा सकेगा, जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के इलाकों का पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, नई परिभाषा और कोर्ट के निर्देश मिलकर फिलहाल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं।

