Last Updated: September 23, 2026

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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, रेलवे ने वेटिंग लिस्ट पर लगाई 25% की सीमा, अब जल्दी कन्फर्म होंगे टिकट

June 21, 2025

यात्रीगण कृपया ध्यान दें, रेलवे ने वेटिंग लिस्ट पर लगाई 25% की सीमा, अब जल्दी कन्फर्म होंगे टिकट

नेशनल डेस्क : भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। अब ट्रेनों में वेटिंग टिकट की संख्या को सीमित कर दिया गया है। रेल मंत्रालय ने यह घोषणा की है कि अब किसी भी ट्रेन में कुल सीटों का अधिकतम 25% ही वेटिंग टिकट के रूप में जारी किया जाएगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को एक बेहतर और अधिक व्यवस्थित यात्रा अनुभव देना है। इससे ओवरबुकिंग और बिना कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों की समस्या पर भी लगाम लगेगी। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

सभी श्रेणियों पर लागू होगा नियम

आपको बता दें कि यह नया नियम सभी प्रमुख श्रेणियों की ट्रेनों पर लागू होगा, जैसे कि राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, मेल/एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें। रेलवे ने साफ किया है कि अब एसी फर्स्ट क्लास, एसी सेकंड, एसी थर्ड, स्लीपर क्लास और चेयर कार – सभी में वेटिंग टिकटों की सीमा ट्रेन की कुल क्षमता के 25 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी ट्रेन में कुल 1,000 सीटें हैं, तो अब सिर्फ 250 वेटिंग टिकट ही दिए जा सकेंगे। इससे यात्रियों को आखिरी समय तक टिकट कन्फर्म होने का इंतजार करने की चिंता से काफी राहत मिल सकती है।

आरक्षित कोटे पर नहीं होगा असर

हालांकि, रेलवे ने यह फैसला दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं और अन्य विशेष कोटों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इसका मतलब है कि इन आरक्षित श्रेणियों के यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं पहले की तरह बनी रहेंगी। इस नियम से केवल सामान्य वेटिंग टिकटों की संख्या को सीमित किया गया है।

भीड़ और अव्यवस्था होगी कम

दरअसल, रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि वेटिंग टिकट अधिक संख्या में जारी होने के कारण कई बार बिना कन्फर्म टिकट वाले यात्री आरक्षित डिब्बों में चढ़ जाते थे। इससे डिब्बों में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था फैलती थी। अब जब वेटिंग टिकट सीमित होंगे, तो यात्रियों को पहले से अपनी टिकट स्थिति का अंदाज़ा लग जाएगा और जो लोग टिकट कन्फर्म नहीं करवा पाएंगे, वे दूसरी योजनाएं बना सकेंगे। इससे डिब्बों में भीड़ का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

पहले क्या था नियम?

अगर हम पुराने नियमों की बात करें, तो जनवरी 2013 के एक सर्कुलर के अनुसार, रेलवे हर क्लास के लिए वेटिंग टिकट की संख्या पहले से तय करता था। उदाहरण के तौर पर…

-AC फर्स्ट क्लास में अधिकतम 30 वेटिंग टिकट

-AC सेकंड में 100

-AC थर्ड में 300

-स्लीपर क्लास में 400 वेटिंग टिकट जारी किए जाते थे

लेकिन अब इन निर्धारित संख्याओं की बजाय कुल सीटों का प्रतिशत आधार बन गया है, जिससे यह प्रणाली अधिक लचीली और व्यावहारिक हो गई है।

क्या होगा फायदा?

इस नई नीति से यात्रियों को कई फायदे होंगे, जैसे…

-कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी।

-वेटिंग लिस्ट पारदर्शी और व्यावहारिक होगी।

-बिना कन्फर्म टिकट के लोग ट्रेन में चढ़ने से बचेंगे।

-भीड़भाड़ और अव्यवस्था में कमी आएगी।

-यात्रियों को यात्रा के पहले ही टिकट की स्थिति समझ में आएगी।

भारतीय रेलवे का यह कदम यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है। वेटिंग टिकटों की सीमा तय होने से न सिर्फ ट्रेनों में भीड़ और अव्यवस्था कम होगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा मिलेगी। यदि यह नीति सफल रहती है, तो आने वाले समय में ट्रेन यात्रा और अधिक आरामदायक और योजनाबद्ध हो सकेगी।

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