शिमला: हिमाचल प्रदेश में IGMC शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की। डॉक्टरों ने डॉ. राघव नरूला से जुड़े मामले में निष्पक्ष और पूरी जांच कराने की मांग रखी।
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के अध्यक्ष सोहिल शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि डॉ. राघव नरूला के मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की शिकायतों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। यह पूरा मामला 22 दिसंबर की एक घटना के बाद सामने आया, जब IGMC में डॉ. राघव नरूला और एक मरीज अर्जुन पवार के बीच झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बना।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त कर दीं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इस झगड़े के लिए डॉक्टर और मरीज, दोनों जिम्मेदार थे। इसके बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस फैसले का विरोध किया और हड़ताल की चेतावनी दी। RDA ने साफ कहा था कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 27 दिसंबर को सुबह 9:30 बजे से हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन OPD और वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर बंद रहेंगे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने डॉक्टरों को भरोसा दिलाया कि अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए नए और सख्त सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही, अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों को धमकाने वाली भीड़ के खिलाफ कार्रवाई का भी वादा किया गया है।
RDA ने IGMC में सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने CCTV कैमरों की कमी और पहले से बताई गई सुरक्षा खामियों के बावजूद ठोस कदम न उठाए जाने पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। डॉक्टरों ने कहा कि आगे के विरोध कार्यक्रम और अगली रणनीति पर बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा और जल्द इसकी जानकारी दी जाएगी।
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