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Axiom 4 Mission : ISS पहुंचा देश का दूसरा बेटा, शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास… भारत के लिए गर्व का पल

नेशनल डेस्क : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया है। उनका स्पेसक्राफ्ट Axiom Mission 4 अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक डॉक हो चुका है। यह पल न केवल भारत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे देशवासियों के लिए भी एक भावुक और प्रेरणादायक घटना बन गया है। शुभांशु अब 14 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन में रहकर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिसर्च करेंगे। इस मिशन को नासा ने लाइव प्रसारित किया, जिसे लाखों भारतीयों ने उत्साह के साथ देखा। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

41 साल पहले गए थे राकेश शर्मा 

आपको बता दें कि शुभांशु शुक्ला राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय नागरिक हैं। 41 साल पहले 1984 में राकेश शर्मा सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए थे। अब इतने वर्षों बाद भारत के एक और सपूत ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा फहराया है।

मां की आंखों में खुशी के आंसू…

जब डॉकिंग हुई और शुभांशु का यान ISS से जुड़ा, तो उनके परिवार की भावनाएं छलक पड़ीं। उनकी मां आशा शुक्ला इस ऐतिहासिक पल पर आंसुओं में डूबी हुईं दिखीं। उन्होंने कहा कि यह उनके बेटे की मेहनत और ईश्वर की कृपा का नतीजा है। हर दिन उन्होंने बेटे की सफलता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की थी।

स्कूल में जश्न का माहौल, छात्र और शिक्षक उत्साहित

लखनऊ में शुभांशु के स्कूल की लाइव तस्वीरें भी सामने आईं, जहां डॉकिंग के पल को बड़े उत्साह और गौरव से देखा गया। स्कूल के शिक्षक, स्टाफ और बच्चे टकटकी लगाए टीवी स्क्रीन पर नज़रें टिकाए बैठे थे। छात्र जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे और भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे।

सरकारी की ओर शुभकामनाएं

भारत सरकार की ओर से भी इस मिशन को लेकर खुशी जताई गई। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट करके बधाई दी और लिखा, “शुभांशु अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के द्वार पर खड़ा है… 14 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा में प्रवेश करने की प्रतीक्षा में… जबकि पूरी दुनिया उत्साह के साथ देख रही है।”

डॉकिंग कैसे हुई, और क्यों है यह पल खास?

डॉकिंग एक बेहद जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें अंतरिक्ष यान को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से सुरक्षित और सटीक रूप से जोड़ना होता है। यह मिशन पूरी तरह सफल रहा। यह दिखाता है कि भारत अब कमर्शियल और वैज्ञानिक अंतरिक्ष अभियानों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा देगा, खासकर ISRO के आगामी गगनयान मिशन के लिए यह प्रेरणा बनेगा।


परिवार ने दिया गर्व भरा बयान

पिता शंभू दयाल शुक्ला ने डॉकिंग के बाद कहा कि वह इस पल के लिए भगवान के बेहद आभारी हैं। उन्होंने कहा, “हम बहुत प्रसन्न हैं, हमारे बेटे ने यह कर दिखाया। हमने प्रार्थना की थी और भगवान ने हमें आशीर्वाद दिया।” शुभांशु का यह प्रयास न केवल उनके परिवार का, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाने वाला है। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। यह पल बताता है कि अगर मेहनत और लगन हो, तो अंतरिक्ष भी दूर नहीं। अब देश उनकी वापसी की कामना कर रहा है, और इस मिशन से जो वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी, वह आने वाले समय में भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में और आगे ले जाएगी।

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