नेशनल डेस्क: कांग्रेस सांसद और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। सरमा ने गोगोई पर पाकिस्तान के साथ रिश्ते रखने और वहां जाने का आरोप लगाया था। गोगोई ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि यह यात्रा एक दशक पहले, 2013 में उनकी पत्नी के पेशेवर काम के सिलसिले में हुई थी, और इसमें कोई गलत बात नहीं थी।
असम के लोग जानते हैं सच्चाई
गोगोई ने कहा, “सत्ताधारी पार्टी अब मेरी इस यात्रा का इस्तेमाल मुझे बदनाम करने के लिए कर रही है। वे इसे एक ‘सी-ग्रेड फिल्म’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो 10 सितंबर को रिलीज होने वाली है, लेकिन यह पूरी तरह से फ्लॉप साबित होगा। असम के लोग जानते हैं कि ये सब केवल राजनीति है।” गोगोई ने अपनी पत्नी के काम की व्याख्या करते हुए कहा कि उनकी पत्नी, जो एक जानी-मानी सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ हैं, जलवायु परिवर्तन पर एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना पर काम कर रही थीं। इस परियोजना के तहत वह 2012-13 में पाकिस्तान में थीं, और गोगोई भी उस समय उनके साथ गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा में कोई भी अवैध गतिविधि नहीं हुई थी।
जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं?
गोगोई ने सवाल किया, “अगर मैंने या मेरी पत्नी ने कोई गलत काम किया था, तो 11-12 साल पहले केंद्र सरकार और उसकी जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं?” उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार करते वक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और नियम होते हैं, और उन्हें कभी भी कोई अवैध कार्य करने का मौका नहीं मिला।
मुख्यमंत्री ने क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गोगोई पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पाकिस्तान के आईएसआई के निमंत्रण पर वहां यात्रा की थी, और यह यात्रा पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित की गई थी, न कि उनके सांस्कृतिक या विदेश मंत्रालय द्वारा। सरमा ने इसे “गंभीर मुद्दा” बताते हुए यह भी कहा कि असम सरकार 10 सितंबर को अपनी विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी।
सरमा ने अपने ट्वीट में कहा, “गौरव गोगोई ने खुद स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तान गए थे। लेकिन यह शुरुआत है, अंत नहीं। हम गंभीर साक्ष्य लेकर आएंगे, जो यह दिखाएंगे कि गोगोई ने पाकिस्तान के प्रतिष्ठान के साथ नजदीकी रिश्ते बनाए थे।”
जांच के लिए SIT का गठन
इसके साथ ही, असम सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, और 10 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट पूरी करने का वादा किया है। सरमा ने कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसे सार्वजनिक किया जाएगा। इस विवाद ने कांग्रेस पार्टी को आलोचनाओं का सामना कराया है, क्योंकि कुछ लोग इसे पार्टी के अंदर एक “खतरनाक” व्यक्ति को बढ़ावा देने की कोशिश मान रहे हैं।
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