Last Updated: September 23, 2026

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Pune Porsche accident: सुप्रीम कोर्ट से तीन आरोपियों को मिली जमानत, दो IT पेशेवरों की हुई थी मौत

February 2, 2026

Pune Porsche accident: सुप्रीम कोर्ट से तीन आरोपियों को मिली जमानत, दो IT पेशेवरों की हुई थी मौत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 के चर्चित पुणे पोर्श कार हादसा मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। इस हादसे में दो आईटी पेशेवरों की जान चली गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान न केवल मामले की गंभीरता पर बात की, बल्कि माता-पिता की जिम्मेदारी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि “नशे की समस्या एक अलग मुद्दा है, लेकिन नाबालिग बच्चों को कार की चाबियां देना और खुला पैसा देना, ताकि वे ऐश कर सकें यह पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है।” कोर्ट ने साफ कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों पर नियंत्रण रखना चाहिए, खासकर तब जब बच्चे नाबालिग हों।

किन आरोपियों को मिली जमानत?

सुप्रीम कोर्ट से जिन तीन आरोपियों को जमानत मिली है, उनके नाम और आरोप इस प्रकार हैं… अमर संतोष गायकवाड़, आरोप है कि उसने तीन लाख रुपये देकर एक डॉक्टर के सहायक के जरिए नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलवाया। आदित्य अविनाश सूद, आशीष सतीश मित्तल, इन दोनों के ब्लड सैंपल जांच में इस्तेमाल किए गए थे। बताया गया कि ये सैंपल कार में मौजूद नाबालिगों से जुड़े थे। इससे पहले, दिसंबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमर गायकवाड़ समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा और अब तीन आरोपियों को जमानत दे दी गई है।

क्या था पुणे पोर्श हादसा?

यह हादसा 18–19 मई 2024 की रात पुणे में हुआ था। करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को एक 17 साल का नाबालिग लड़का बहुत तेज रफ्तार से चला रहा था। कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गई। बाइक पर सवार दो आईटी प्रोफेशनल्स की मौके पर ही मौत हो गई।

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नाबालिग आरोपी को लेकर विवाद

हादसे के सिर्फ 14 घंटे बाद नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिन तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का आदेश दिया था। इस फैसले पर देशभर में नाराज़गी हुई, जिसके बाद उसकी जमानत रद्द कर दी गई। पुणे पुलिस की मांग पर उसे ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया हालांकि, जून 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाबालिग की रिहाई का आदेश दे दिया।

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