इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका ने विदेशी धरती पर चीन की टेंशन को बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि अमेरिका के कदम के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में टैलिसमैन सेबर सैन्य अभ्यास चल रहा है। इसमें भारत और अमेरिकी सेना भी हिस्सा ले रही है। इस अभ्यास के दौरान अमेरिका ने अपने मिड-रेंज कैपेबिलिटी वाले टाइफून मिसाइल सिस्टम का टेस्ट किया है, जिसके बाद चीन की टेंशन बढ़ना लाजिमी है।
इस लाइव फायरिंग टेस्ट की वजह से ड्रैगन असहज नजर आ रहा है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने अपनी धरती से बाहर कोई टेस्ट किया हो। हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में दूसरी बार अमेरिका ने अपनी मिसाइल की तैनाती की है। बता दें कि इससे पहले फिलीपींस में अमेरिका इस मिसाइल की तैनाती कर चुका है।
The US Army demonstrated the first live firing of the Typhon land-based missile system in Australia.https://t.co/kyGobcDbzT pic.twitter.com/2gZ6yySvOW
— Roni Sontani (@Roni_Sont) July 18, 2025
ऑस्ट्रेलिया में चल रहा यह सैन्य अभ्यास काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अभ्यास में कई देश भाग ले रहे हैं। बता दें कि टाइफून जहाज को डुबो देने वाली घातक मिसाइल मानी जाती है। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार विदेशी धरती पर अमेरिका ने ऐसी टेस्टिंग की है। इस लाइव टेस्ट को अमेरिका ने सफल करार दिया है।
इन दिनों चीनी पीपुल्स लिबरेशन नेवी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आक्रामक रवैया दिखा रही है। इसके चलते माना जा सकता है कि इससे चीन की टेंशन बढ़ सकती है। कुछ दिन पहले चीन ने भी न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को बिना बताए एक लाइव फायर टेस्ट किया था। माना जा रहा है कि चीन की विस्तारवादी सोच अब अपनी समुद्री सीमा से बाहर देखने को भी मिल रही है।
अमेरिका टाइफून मिसाइल को स्थायी तौर पर तैनात करना चाहता है। इसकी मारक क्षमता भी ठीक है। यह मिसाइल चीन सागर से लेकर चीन के शहरी इलाकों तक हमला करने में कारगर है। पहले इसे फिलीपींस में तैनात किया गया था। अब नया परीक्षण ऑस्ट्रेलिया में किया गया है। यह मिसाइल लोड होने से पहले 16 मिसाइलों का ग्रुप दागने की क्षमता रखी है। इसका निशाना भी अचूक माना जाता है। ये खासियतें ही इस मिसाइल को खास बनाती हैं।
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