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क्या तरबूज को लाल दिखाने के लिए मिलाया जाता है केमिकल रंग? FSSAI ने किया बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली: गर्मियों में पसंद किए जाने वाले रसीले फल तरबूज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। इनमें सबसे आम दावा यह है कि बाजार में मिलने वाले तरबूजों में इंजेक्शन के जरिए लाल रंग या केमिकल डाई डाली जाती है ताकि वे ज्यादा बेहतर दिखें। लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है।

इंजेक्शन से रंग डालने का दावा कितना सच?

FSSAI के अनुसार, तरबूज में इंजेक्शन लगाकर रंग भरने का विचार संभव नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी फल में सुई के जरिए रंग डाला जाए, तो वह समान रूप से पूरे फल में नहीं फैलता, बल्कि केवल एक स्थान पर गहरे दाग या निशान बन जाते हैं। इसके अलावा, इतने बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्ध तरबूजों में इस तरह की प्रक्रिया करना न तो आर्थिक रूप से संभव है और न ही व्यावहारिक।

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स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक होता ऐसा तरीका

खाद्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी फल में सुई लगाई जाती है तो उसमें बैक्टीरिया के प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है, जिससे फल जल्दी खराब हो सकता है और उसका स्वाद भी बिगड़ जाता है। यही कारण है कि तरबूज में इंजेक्शन से रंग डालने की बात वैज्ञानिक रूप से भी सही नहीं मानी जाती।

पानी में रंग निकलने का मिथक

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जाता है कि अगर तरबूज को पानी में डालने पर पानी लाल हो जाए, तो उसमें सिंथेटिक रंग मिला है। FSSAI के अनुसार, यह भी एक गलत धारणा है। कई प्राकृतिक फलों में मौजूद पिगमेंट या फाइबर पानी के संपर्क में आने पर हल्का रंग छोड़ सकते हैं, जिसका मतलब यह नहीं कि उनमें केमिकल डाई मिलाई गई है।

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पोषक तत्वों से भरपूर है तरबूज

विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में लगभग 90% से अधिक पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन C, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फोलेट जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्मियों में शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

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