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Bangladesh Dengue: बांग्लादेश में डेंगू का बढ़ा कहर, 16 दिनों में 74 लोगों की मौत

Bangladesh Dengue

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Bangladesh Dengue Outbreak: बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप तेजी से गंभीर होता जा रहा है। सितंबर के शुरुआती 16 दिनों में ही इस बीमारी से 74 लोगों की मौत हो चुकी है। यह संख्या अगस्त में पूरे महीने दर्ज हुई 43 मौतों से करीब 72 प्रतिशत अधिक है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और मौतों की दैनिक दर में भी तेज उछाल देखने को मिला है।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के आंकड़ों पर ‘ढाका ट्रिब्यून’ के विश्लेषण के अनुसार, सितंबर में अब तक रोजाना औसतन 4.6 डेंगू मरीजों की मौत हुई है, जबकि अगस्त में यह औसत लगभग 1.4 था। बुधवार सुबह समाप्त हुए 24 घंटे के दौरान सात और मरीजों की जान गई, जबकि 1,753 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके साथ ही 2026 में डेंगू से मरने वालों की कुल संख्या 171 और अस्पताल में भर्ती मरीजों का आंकड़ा 56,916 पहुंच गया है।

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एक दिन में अस्पताल पहुंचने वाले 1,753 मरीज इस साल का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह आंकड़ा मानसून के बाद डेंगू के बढ़ते प्रकोप की गंभीरता को दर्शाता है। यूएनबी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में 9,206 डेंगू मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे, जबकि अगस्त में यह संख्या बढ़कर 20,536 हो गई। सितंबर में स्थिति और तेजी से बिगड़ी है और लगभग रोजाना एक हजार से अधिक मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।

बुधवार को अस्पताल में भर्ती किए गए 1,753 मरीजों में से 744 ढाका और आसपास के क्षेत्रों से थे। इसके अलावा खुलना में 349, बारीसाल में 186, चटगांव में 177, राजशाही में 153, मयमनसिंह में 83, रंगपुर में 53 और सिलहट में नौ मरीज भर्ती हुए। इसी अवधि में हुई सात मौतों में से सभी ढाका के बाहर दर्ज की गईं। इनमें तीन मौतें खुलना और एक-एक चटगांव, मयमनसिंह, राजशाही तथा रंगपुर में हुईं, जिससे बीमारी के अन्य क्षेत्रों में फैलने का संकेत मिलता है।

इस साल अब तक डेंगू से सबसे ज्यादा 80 मौतें ढाका में हुई हैं। इसके बाद खुलना में 32, मयमनसिंह में 18, चटगांव में 16, बारीसाल में 13, राजशाही में आठ, रंगपुर में तीन और सिलहट में एक मौत दर्ज की गई है। हालांकि, जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अस्पतालों के आंकड़ों से संक्रमण के वास्तविक भौगोलिक फैलाव का पूरी तरह आकलन नहीं किया जा सकता, क्योंकि गंभीर मरीजों को अक्सर दूसरे जिलों से इलाज के लिए ढाका भेजा जाता है।

डीजीएचएस के बीमारी नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक प्रोफेसर बे-नजीर अहमद ने कहा कि केवल फॉगिंग के जरिए डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। उनके अनुसार, एडीज मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों की पहचान कर उन्हें खत्म करना अधिक जरूरी है। साथ ही गंभीर मामलों और मौतों को रोकने के लिए बीमारी की जल्द पहचान और समय पर इलाज आवश्यक है। जुलाई के बाद संक्रमण में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि प्रभावी रोकथाम नहीं होने पर नवंबर तक मरीजों और मौतों की संख्या और बढ़ सकती है।

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