
Black Cardamom : हमारी रसोई में कई ऐसे मसाले छिपे होते हैं जिन्हें हम अक्सर कम आंकते हैं। इन्हीं में से एक है काली इलायची। यह अपने स्वाद और सुगंध से व्यंजनों को एक अलग पहचान देती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। काली इलायची को नेपाली इलायची भी कहा जाता है। यह मसाला नेपाल और भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है और आमतौर पर नमकीन व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। यह ज़िंगिबरेसी परिवार से संबंधित है। इसकी फलियां बड़ी, खुरदरी और गहरे भूरे या काले रंग की होती हैं, जिनके अंदर छोटे, चिपचिपे काले बीज होते हैं।
पाचक गुणों से भरपूर
चरक संहिता में, काली इलायची का उपयोग दर्द, सांसों की दुर्गंध, त्वचा रोग, मतली और पाचन संबंधी समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किया गया है। इसे अंगमारद प्रशमन महाक्षय के अंतर्गत भी सूचीबद्ध किया गया है, जो शरीर के दर्द से राहत दिलाने में उपयोगी है। आयुर्वेद में, काली इलायची को पाचक और पाचक गुणों से भरपूर माना जाता है। यह पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करती है। गर्मियों में काली इलायची का पानी पीने से गैस, कब्ज, पेट दर्द की समस्या भी कम होती है। साथ ही, यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मदद करती है।
बीमारियों के खतरे को करते हैं कम
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, काली इलायची में ओज बढ़ाने वाले गुण होते हैं, जो मौसमी संक्रमण और बीमारियों के खतरे को कम करते हैं। गर्मियों में काली इलायची का पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थों को पर्याप्त मात्रा में बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह किडनी को स्वस्थ रखता है, जिससे त्वचा और बालों से संबंधित समस्याएं कम होती हैं। शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने से कई तरह की बीमारियां भी दूर रहती हैं।
रोगाणुरोधी गुण
इसमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं, जो मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने के साथ-साथ सांसों की दुर्गंध और मसूड़ों की समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसकी तेज़ सुगंध और औषधीय गुण सर्दी-जुकाम, खांसी और गले की खराश से राहत दिला सकते हैं।