Site icon Dainik Savera Times

जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छर-जनित बीमारी के खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने किया आगाह

नई दिल्ली: ‘धरती गर्म हो रही है और जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छरों के प्रजनन की अवधि में विस्तार होता जा रहा है, ऐसे में मच्छरों का प्रकोप और बढ़ेगा तथा ये उन क्षेत्रों में बढ़ेंगे जहां पहले मच्छरों की संख्या कम हो गई थी।’ यह दावा एक विशेषज्ञ ने किया है। रेकिट बेंकिजर में ‘ग्लोबल पैस्ट कंट्रोल इनोवेशन’ के अनुसंधान एवं विकास निदेशक अविजीत दास ने चेतावनी दी है कि उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमरीका में मच्छर जनित रोग पहले से ही स्थानिक हैं, लेकिन ये यूरोप जैसे क्षेत्रों में आबादी को फिर से प्रभावित कर रहे हैं।

दास ने बताया, ‘जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा और पर्यावरणीय स्थितियां परिवर्तित होंगी, मच्छरजनित रोग अन्य स्थानों तक पांव पसारेंगे। किसी खास स्थान पर मच्छर प्रजनन की अवधि के बढ़ने के आसार हैं, जिससे हमें मच्छरों का प्रकोप अधिक दिनों तक झेलना पड़ सकता है। यदि भारत में मच्छरों का प्रकोप पहले 5 महीने तक रहता था तो अगले 10 साल में इसके बढ़कर 6 माह या 7 माह होने के आसार हैं।’ दास का मानना है कि वर्तमान साक्ष्यों के आधार पर इस प्रवृत्ति का विस्तार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत सारे शोध हैं जो इस बात की भविष्यवाणी करते हैं।

 

 

 

 

Exit mobile version