कहते हैं स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत नहीं, बस छोटी-छोटी आदतें अपनाने से बहुत फर्क पड़ता है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर सरल, प्रभावी उपाय सुझाता है।
मंत्रालय के अनुसार, सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना (उषापान), नियमित योग-प्राणायाम, हल्दी-जीरा-लहसुन युक्त भोजन, समय पर भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव कम करने के लिए ध्यान, ये आदतें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं, पाचन सुधारती हैं और स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं।
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एक्सपर्ट के अनुसार, अच्छी सेहत की शुरुआत सही पोषण और छोटी-छोटी दैनिक आदतों से होती है। मौसमी और स्थानीय खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देकर, नियमित समय पर खाना और गुनगुना पानी पीने जैसी आदतें अपनाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा सुधार आ सकता है।
वहीं, संतुलित भोजन और पारंपरिक खानपान की आदतें एक स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनाती हैं। अच्छे खाने के चुनाव से ही अच्छी सेहत मिलती है। इसलिए भोजन में मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और साबुत अनाज जैसे गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का को जरूर शामिल करना चाहिए।
ये खाद्य पदार्थ स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध होते हैं और इनमें प्राकृतिक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। मंत्रालय भोजन पकाने में सावधानी बरतने की और कुछ छोटी बातों पर गौर करने की सलाह देता है।
इसके लिए फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें। खाना पकाने के लिए उबालना, भाप में पकाना या ग्रिल करना सबसे अच्छा तरीका है। ताजा खाना चुनें और तले हुए भोजन, ज्यादा चीनी, ज्यादा नमक और जंक फूड से दूरी बनाए रखें।
दैनिक भोजन की आदतों में सबसे महत्वपूर्ण है- नियमित समय पर खाना। ज्यादा खाने से बचें और खाना खाते समय मोबाइल या टीवी से दूर रहें। पर्याप्त गुनगुना पानी पीना भी सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
भोजन के बाद थोड़ा आराम करना भी फायदेमंद होता है। ये छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय तक टिकाऊ और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करते हैं। इन सरल आदतों को दिनचर्या में शामिल कर सेहत को मजबूत बनाया जा सकता है।

