Site icon Dainik Savera Times | Hindi News Portal

आइए जानते हैं एल्युमीनियम के बर्तन किस तरह डालते है हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव

खाना बनाने से पहले हमें हमेशा इन बातों का ध्यान रखना चाहिए कि हम किस तरह और कैसे खाना बना रहे हैं। क्योंकि हम जो भी बनाते जा खाते हैं उन सब चीजों का असर हम पर और हमारे परिवार पर भी होता हैं। हमें स्वाद के साथ साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारा बनाया हुआ खाना हेअल्थी भी हो। लेकिन आज कल आमतौर पर घरों में एल्यूमीनियम के बर्तनों का प्रयोग किया जाता हैं।एल्यूमीनियम के बर्तन एसिडिक फूड्स के साथ रिएक्ट करते हैं और ये मेटल के कण खाने में मिल जाते हैं, जिसके चलते एल्युमीनियम की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। तो आइए जानते है इससे अधिक नुकसान के बारे में:

टमाटर की ग्रेवी या सॉस
ऐसा इसलिए क्योंकि टमाटर एसिडिक नेचर का होता है और अगर एल्युमीनियम में इसे ज्यादा देर पकाया जाए तो इसके स्वाद पर असर होता है।

सिरका और उससे जुड़ी डिशेज
सिरका भी एल्युमीनियम से बहुत ज्यादा रिएक्ट करता है। सिरका और उससे जुड़ी डिशेज एल्युमीनियम में रखना सही नहीं माना जाता है।

रेड मीट
पश्चिमी आहार में रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट सबसे आम अम्लीय खाद्द पदार्थ हैं। यही कारण है कि रेड मीट को भी इस धातु के बर्तन में कभी न पकाएं। ये आपके लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है।

पैनकेक
पैनकेक बनाने के लिए सबसे अच्छे नॉन स्टिक कुकवेयर होते हैं। यह एल्युमीनियम पैन से ज्यादा सेफ होते हैं, इसलिए आपको पैनकेक इन बर्तनों में बनाना चाहिए।

स्टार्ची फूड्स
स्टार्ची फूड्स भी एसिडिक होते हैं और उन्हें एल्युमीनियम के पैन में पकाना आपके लिए नुकसादायक हो सकता है। यह मेटल को भी खराब कर सकता हैष इसलिए ऐसे फूड्स को इन पैन या अन्य बर्तनों में कुक न करें।

Exit mobile version