Monsoon Word Origin : भारत में मानसून का मौसम शुरू होते ही बारिश, मौसम विभाग की चेतावनियां और राहत भरा मौसम चर्चा का विषय बन जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि “मानसून” शब्द की शुरुआत कहां से हुई और इसका असली मतलब क्या है? दरअसल, इस शब्द का इतिहास कई सदियों पुराना है और इसका संबंध समुद्री व्यापार तथा मौसमी हवाओं से जुड़ा हुआ है।
अरबी भाषा से निकला है ‘मानसून’ शब्द
‘मानसून’ शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के “मौसिम” शब्द से मानी जाती है। मौसिम का अर्थ होता है किसी खास मौसम या साल के निश्चित समय का दौर। पुराने समय में अरब के व्यापारी और नाविक समुद्री रास्तों से भारत और पूर्वी अफ्रीका के बीच व्यापार करते थे। वे अपनी यात्राएं समुद्र में चलने वाली मौसमी हवाओं के अनुसार तय करते थे, इसलिए इन हवाओं के लिए “मौसिम” शब्द का इस्तेमाल किया जाता था।
पुर्तगालियों के जरिए दुनिया तक पहुंचा
15वीं और 16वीं शताब्दी में जब पुर्तगाली व्यापारी हिंद महासागर क्षेत्र में पहुंचे, तो उन्होंने अरबी शब्द “मौसिम” को अपने उच्चारण के अनुसार “मोनसाओ” कहना शुरू किया। समय के साथ यही शब्द अंग्रेजी में “Monsoon” बन गया। बाद में मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस शब्द को अपनाया और आज दुनिया भर में मौसमी हवाओं और उनसे होने वाली बारिश के लिए “मानसून” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
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क्या मानसून सिर्फ बारिश का नाम है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि मानसून का मतलब सिर्फ बारिश होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्मी के बाद जब हवाओं की दिशा बदलती है, तो इस पूरी प्रक्रिया को मानसून कहा जाता है।
समुद्र और जमीन के तापमान में फर्क होने की वजह से समुद्र से नमी वाली हवाएं जमीन की ओर आती हैं। यही हवाएं बादलों के साथ बारिश कराती हैं। यानी मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि मौसम और हवाओं में होने वाला बदलाव भी है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है मानसून?
भारत में मानसून का बहुत महत्व है। इससे लोगों को तेज गर्मी से राहत मिलती है और किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलता है। नदियां, तालाब और बांध भी बारिश से भर जाते हैं, जिससे पानी की जरूरत पूरी होती है।
हालांकि, अगर बहुत ज्यादा बारिश हो जाए तो बाढ़, जलभराव और दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए मानसून लोगों के लिए राहत भी लाता है और कई बार मुश्किलें भी खड़ी कर देता है।
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