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हेल्थ टिप्स: पार्श्वोत्तानासन से रीढ़ होगी लचीली, शरीर रहेगा फिट

Parsvottanasana benefits spine flexibility fitness yoga

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पारंपरिक योग में शरीर के लचीलेपन और मन की शांति बनाए रखने के लिए कई आसन महत्तवपूर्ण हैं। इन्हीं में से एक है पार्श्वोत्तानासन। यह आसन न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ाता है।

‘पार्श्वोत्तानासन’ को अंग्रेजी में ‘इंटेंस साइड स्ट्रेच पोज’ कहते हैं। यह हठयोग का एक महत्वपूर्ण और मूलभूत आसन माना जाता है, जो रीढ़ की हड्डी, हैमस्ट्रिंग और पीठ के निचले हिस्से के लिए अत्यंत लाभकारी है।

पश्चिमोत्तानासन एक संस्कृत शब्द है, जिसमें ‘पश्चिम’ का अर्थ होता है, ‘उत्तान’ और ‘आसन’ का अर्थ है ‘मुद्रा’। यह एक तीव्र स्ट्रेच है जो हैमस्ट्रिंग्स, पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की ओर फैलता है।

आयुष मंत्रालय ने इसके महत्व पर प्रकाश डाला है। आयुष मंत्रालय (सामान्य योग प्रोटोकॉल) के अनुसार, पार्श्वोत्तानासन जिसे ‘तीव्र पार्श्व खिंचाव मुद्रा’ या ‘पिरामिड पोज’ भी कहते हैं, एक खड़े होकर आगे झुकने वाला योग आसन है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने, पैरों और कूल्हों को स्ट्रेच करने, पाचन में सुधार करने और शारीरिक संतुलन व लचीलापन बढ़ाने में बहुत प्रभावी है।

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इसे करना बेहद आसान है। करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन में सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को सामने सीधा फैलाकर बैठें। इसके बाद रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और फिर सासं भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और रीढ़ को ऊपर की ओर खींचें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें। फिर रीढ़ को सीधा रखते हुए आगे बढ़ें और पैर के अंगूठों को पकड़ने या छूने का प्रयास करें।

ऐसे में पैर को सीधा रखकर शरीर के पिछले हिस्से में खिंचाव आता है, फिर 20 से 60 सेकंड तक लंबी गहरी सांसें लेते हुए इस अवस्था में रुकें और सांस भरते हुए धीरे-धीरे सिर और धड़ को ऊपर उठाएं और अपने दोनों हाथों को नीचे लाएं।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द, स्लिप डिस्क या पेट के हालिया ऑपरेशन वाले व्यक्ति इस आसन से बचें। शुरुआती लोगों को यह विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।

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