आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर थकान, मूड स्विंग या चिंता को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे वजह सिर्फ मानसिक तनाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर हो रही कोई हार्मोनल गड़बड़ी भी हो सकती है।
मेडिकल रिसर्च बताती है कि थायरॉइड ग्रंथि में असंतुलन वजन को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग और भावनाओं पर भी असर डाल सकता है। यही कारण है कि कई लोग बिना वजह उदासी, घबराहट या ध्यान की कमी महसूस करते हैं, लेकिन असली कारण समझ नहीं पाते।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, थायरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित होती है। यह ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर के तापमान और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करते हैं। ये हार्मोन दिमाग के केमिकल बैलेंस को भी प्रभावित करते हैं, जिससे हमारी सोचने की क्षमता और भावनाएं संतुलित रहती हैं।
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जब थायरॉइड सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगता है। अगर शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम हो जाए, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है, तो व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ऐसे लोगों को अक्सर काम करने का मन नहीं करता, सोचने की गति धीमी हो जाती है और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि थायरॉइड हार्मोन सीधे तौर पर दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं। ये वही केमिकल्स हैं, जो हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के मानसिक परेशानी होने लगती है।
थायरॉइड की गड़बड़ी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, शरीर में आयोडीन की कमी या अधिकता, लगातार तनाव, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद होने वाले बदलाव भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।

