लाइफस्टाइल डेस्क : गेहूं की रोटी भारत में लगभग हर घर की रसोई में बनती है। इसे दाल, सब्ज़ी या दूध के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए गेहूं की रोटी परेशानी का कारण बन सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ बीमारियों में इस रोटी से बचना ज़रूरी है।
किन लोगों को गेहूं की रोटी नहीं खानी चाहिए
सीलिएक रोग
यह ऑटोइम्यून रोग है जिसमें शरीर ग्लूटेन को पचा नहीं पाता। गेहूं खाने से छोटी आंत को नुकसान पहुंचता है और पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है।
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ग्लूटेन सेंसिटिविटी
कुछ लोगों में सीलिएक रोग नहीं होता, लेकिन गेहूं खाने से पेट फूलना, गैस, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ऐसे लोग रोटी की मात्रा कम करें या पूरी तरह से परहेज़ करें।
गेहूं से एलर्जी
गेहूं खाने के बाद शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इसके लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सांस लेने में तकलीफ़ या नाक बहना शामिल हो सकते हैं।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
IBS वाले लोग गेहूं में मौजूद ‘फ्रुक्टन्स’ को पचा नहीं पाते। इससे गैस, पेट में दर्द और पाचन संबंधी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।
टाइप-2 डायबिटीज
गेहूं का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होने की वजह से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। डायबिटीज वाले लोग मैदा से बचें और चोकरयुक्त गेहूं का सेवन करें।
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नोट: यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य सुझाव के लिए है। किसी भी डाइट या हेल्थ प्रोग्राम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। दैनिक सवेरा टाइम्स किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

