Last Updated: October 7, 2026

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30 दिन तक जेल में रहे तो जाएगी कुर्सी, अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया बिल

August 20, 2025

30 दिन तक जेल में रहे तो जाएगी कुर्सी, अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया बिल

नई दिल्ली:  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 पेश किया। इस बिल के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री अगर गिरफ्तार होते हैं तो उन्हें पद से हटना होगा। ये नियम केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद भी लागू होगा। सीरियस क्रिमिनल चार्ज में डिटेन होने पर भी उन्हें पद से हटाया जाएगा।

पहले के अपडेट के मुताबिक, प्रस्तावित प्रावधानों के तहत, यदि कोई मंत्री किसी गंभीर अपराध (5 वर्ष या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराध) के आरोप में लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे।

प्रधानमंत्री
यदि प्रधानमंत्री सलाह नहीं देते हैं, तो 31वें दिन के बाद मंत्री स्वतः ही पद से हट जाएंगे। यदि प्रधानमंत्री स्वयं ऐसे आरोपों में 30 दिनों तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा, अन्यथा उनका पद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। इसी प्रकार, यदि कोई राज्य मंत्री 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे।

मुख्यमंत्री
यदि सलाह नहीं दी जाती है, तो 31वें दिन मंत्री का पद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। यदि मुख्यमंत्री स्वयं 30 दिनों तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उनका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम
प्रस्तावित विधेयक संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA के साथ-साथ जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव करता है।

राज्य मंत्री
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी राज्य मंत्री सहित कोई भी मंत्री, जिसे पाँच वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय किसी अपराध के संबंध में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार और हिरासत में रखा जाता है, उसे पद से हटाया जा सकता है।

राज्य के मंत्री को हटाने की प्रक्रिया-
प्रस्तावित संशोधन जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में एक नया खंड – (4A) – जोड़ने का प्रस्ताव करता है। यह खंड निर्दिष्ट करता है कि अपने कार्यकाल के दौरान लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार और हिरासत में रखे गए किसी मंत्री को मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल द्वारा 31वें दिन तक हटा दिया जाएगा। यदि मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी सलाह नहीं दी जाती है, तो मंत्री अगले दिन से स्वतः ही पद से हट जाएँगे।

निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता का विश्वास
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था प्रस्तावित है, जहाँ हिरासत में लिए गए मंत्री या प्रधानमंत्री को लगातार हिरासत में रहने के 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों का विवरण संवैधानिक नैतिकता की रक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने की तात्कालिकता पर प्रकाश डालता है।

संविधान में किसी मंत्री को हटाने का प्रावधान नहीं
इसमें कहा गया है कि निर्वाचित नेता जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक होते हैं, लेकिन वर्तमान में संविधान में ऐसे किसी भी वर्तमान प्रधानमंत्री या मंत्री को पद से हटाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिन्हें गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में लिया गया हो।

इस वक्तव्य में कहा गया है, “यह अपेक्षित है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह की किरण से परे हो।” “गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे, गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए किसी मंत्री द्वारा संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों को विफल या बाधित किया जा सकता है और अंततः लोगों द्वारा उन पर रखे गए संवैधानिक विश्वास को कम कर सकता है।”

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