समालखा। यहां की यमुना नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन के चलते रविवार को किसानों का गुस्सा फूट गया। गांव राक्सेड़ा में हथवाला, राक्सेड़ा, कारकौली, बुढ़नपुर और सिम्बलगढ़ के किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रशासन से खनन पर तुरंत रोक लगाने की मांग भी की।
किसानों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में केवल खनन चोरीछिप्पे नहीं बल्कि खुलेआम हो रहा है। ये ऐसे ही हो रहा है जैसे सरकार ने ठेका दिया हो। बड़े-बड़े ट्रक दिन-रात गांवों की गलियों से गुजर रहे हैं, जिससे हादसों डर रहता है। इस वजह से ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना था कि वे कई बार प्रशासन और प्रदेश के खनन मंत्री तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार या प्रशासन की ओर से आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। किसानों ने चेताया कि पिछले वर्षों में अवैध खनन के कारण सैकड़ों एकड़ भूमि यमुना के कटाव में समा चुकी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अब दोबारा उसी स्थिति के बनते हालात ने लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन पर मिलीभगत और लापरवाही के गंभीर आरोप भी लगाए गए। किसानों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे खनन माफिया के हौसले बुलंद हैं।
किसानों ने फिर चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अवैध खनन पर रोक नहीं लगी, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। साथ ही मांग की गई कि तुरंत मौके पर पहुंचकर खनन बंद कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र को संभावित बाढ़ और भूमि क्षरण से बचाया जा सके। प्रदर्शन में एडवोकेट राम दिया त्यागी, सरपंच सतीश, सुशील त्यागी, राम सिंह, पूर्व सरपंच जय प्रकाश शर्मा, ब्लॉक समिति सदस्य सुभाष समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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