Last Updated: October 22, 2026

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क्या केरल में ध्वस्त होने की कगार पर हैं सहकारी बैंक

October 2, 2023

क्या केरल में ध्वस्त होने की कगार पर हैं सहकारी बैंक

तिरुवनंतपुरम: त्रिशूर में और राज्य की राजधानी में एक सहकारी बैंक कुछ समय से सुर्खयिों में है, जहां जमाकर्ता अपनी जमा राशि वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनमें एक डर पैदा हो गया है। केरल में सहकारी बैंकों का नेतृत्व मूल रूप से उस इलाके के प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय नेताओं द्वारा किया जाता है और इसलिए इस क्षेत्र का पूरी तरह से राजनीतिकरण किया जाता है और किसी भी गड़बड़ी से भारी राजनीतिक उथल-पुथल होता है।

सहकारिता राज्य मंत्री वी.एन.वासवन ने बताया है कि राज्य में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की राज्य में बैंकिंग व्यवसाय में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसका जमा आधार 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और इसने ऋण बढ़ाया है। 1.86 लाख करोड़ रुपये का घोटाला और केंद्र इस क्षेत्र को परेशान करने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रहा है। विशेष रूप से सत्तारूढ़ सीपीआई-एम तब से बहुत कठिन समय से गुजर रही है, जब से करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक ऋण घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने त्रिशूर में छापा मारा है।

सीपीआई-एम के लिए एक बड़ी शर्मदिंगी में, ईडी ने पिछले हफ्ते एक पार्टी पार्षद और पिछले महीने दो संदिग्ध बिचौलियों को गिरफ्तार किया है और पार्टी विधायक व पूर्व राज्य मंत्री ए.सी.मोइदीन और राज्य समिति के सदस्य व पूर्व विधायक सहित पार्टी के दो शीर्ष नेताओं से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। एम.के.कन्नन, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी.गोविंदन सहित सभी शीर्ष अधिकारी सम्मानजनक समाधान का प्रयास कर रहे हैं।

त्रिशूर में सीपीआई-एम करुवन्नूर घोटाले को लेकर गहरे संकट में है। निर्दोष जमाकर्ता चिंता में जी रहे हैं। गोविंदन और विजयन यह कहकर उन्हें शांत करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। त्रिशूर, जहां लोकसभा चुनाव में असफल रहे सुपरस्टार सुरेश गोपी फिर से चुनाव लड़ने पर नजर गड़ाए हुए हैं।

सोमवार को गोपी और उनकी पार्टी के लोग करुवन्नूर बैंक तक पदयात्रा निकाल रहे हैं। राज्य भाजपा अध्यक्ष के.सुरेंद्रन ने सोमवार को कहा कि जब सहकारी क्षेत्र के मुद्दों की बात आती है, तो सीपीआई-एम और कांग्रेस आपस में मिले हुए हैं और यह अच्छा संकेत नहीं है।

एक मीडिया समीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि दुनिया भर में पूरा बैंकिंग कारोबार भरोसे पर चलता है। ‘‘यदि सभी जमाकर्ता किसी भी बैंक से अपनी पूरी जमा राशि निकालने के लिए कतार में लग जाएं, तो यह ध्वस्त हो जाएगा। और यह सहकारी बैंकों के लिए भी सच है, क्योंकि केरल के हर गांव में स्थानीय लोगों को आसान पहुंच और मित्रवत स्थानीय कर्मचारियों और ऋण प्राप्त करने के लिए कम बोझिल प्रक्रियाओं के कारण वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में ऐसे बैंकों पर पूरा भरोसा है।

आलोचक ने कहा, यह विशेष घोटाला है और अन्य दलों की तुलना में सीपीआई-एम को अधिक प्रभावित किया है क्योंकि सहकारी क्षेत्र उनका गढ़ है और हालांकि हमने कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व वाले कुछ ऐसे बैंकों के बारे में खबरें सुनी हैं जिनमें भी समस्या है।

इस बीच विपक्ष के नेता वी.डी.सतीसन ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के बारे में पिछले हफ्ते आई एक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई, उन्होंने आरोप लगाया कि यह आर्डर पर बनाई गई रिपोर्ट है, क्योंकि इसमें आरोप लगाया गया है कि जिन बैंकों में समस्या है, वे कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा शासित हैं। अब सभी की निगाहें ईडी और उसकी चल रही जांच पर हैं, और अगर मोइदीन के लिए चीजें खराब हो गई, जो दूसरे दौर की पूछताछ के लिए उपस्थित होने में विफल रहे, तो सीपीआई-एम के लिए चीजें खराब हो सकती हैं।

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