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चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में दलितों, आदिवासियों पर अत्याचार से बढ़ रहीं भाजपा की मुश्किलें

July 25, 2023

चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में दलितों, आदिवासियों पर अत्याचार से बढ़ रहीं भाजपा की मुश्किलें

भोपाल: मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी समुदायों के खिलाफ अत्याचार की एक के बाद एक घटनाएं लगभग दो दशक लंबे शासन के कारण पहले से ही सत्ता विरोधी लहर का सामना कर ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुश्किलें बढ़ाती दिख रही हैं।दलित समुदायों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं पहले ही राज्य भर में सुर्खयिां बटोर चुकी हैं, लेकिन अधिक चिंता की बात यह है कि ये मामले एक विशेष क्षेत्र – विंध्य क्षेत्र से रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जिससे भाजपा के लिए और अधिक सिरदर्द पैदा हो गया है क्योंकि चुनाव केवल चार महीने दूर हैं।

विंध्य क्षेत्र – छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे उच्च जाति के प्रभुत्व वाले क्षेत्र में अत्याचार के लगातार मामले शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ नाराजगी पैदा कर रहे हैं।2018 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने विंध्य क्षेत्र की 30 सीटों में से 24 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को शेष छह सीटें मिली थीं।अत्याचार की ताजा घटना छतरपुर जिले से सामने आई, जहां एक दलित युवक ने आरोप लगाया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के एक व्यक्ति ने उसकचेहरे और शरीर पर मानव मल लगा दिया।

विशेष रूप से, छतरपुर खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व राज्य भाजपा प्रमुख वी.डी. शर्मा करते हैं, जबकि मुख्यमंत्री चौहान भी ओबीसी समुदाय से हैं।गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है जब छतरपुर जिले में किसी दलित को ऊंची जाति के लोगों ने पीटा या प्रताड़ित किया हो।इस विशेष क्षेत्र से कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें दलित परिवारों द्वारा निकाली गई शादी की बारातों को ऊंची जाति के लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें बारात निकालते समय पुलिस सुरक्षा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।पिछले साल सितंबर में एक 35 वर्षीय दलित व्यक्ति पर केवल कुर्सी पर बैठने के कारण ठाकुर समुदाय के युवाओं के एक समूह ने हमला कर दिया था।

23 जून को रीवा जिले में एक दलित पिता-पुत्र की जोड़ी को कथित तौर पर लाठियों से पीटा गया और उनके गले में जूतों की माला डालकर घुमाया गया।ऐसी ही एक और घटना अभी कुछ दिन पहले ही सामने आई थी जिसमें रीवा में ऊंची जाति के लोगों ने एक आदिवासी व्यक्ति की पिटाई कर दी थी।नवंबर 2021 में हुई एक चौंकाने वाली घटना में एक दलित दिहाड़ी मजदूर का हाथ कथित तौर पर उसके उच्च जाति के नियोक्ता द्वारा काट दिया गया था, क्योंकि उसने अपनी बकाया मजदूरी मांगी थी।अगस्त 2022 में सतना में एक दलित महिला सरपंच की दबंगों ने पिटाई कर दी. यहां तक कि जिन लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, उन्हें ऊंची जाति के लोगों के एक समूह ने लात और मुक्कों से पीटा।

उसी महीने, सिंगरौली में एक 16 वर्षीय दलित छात्र को कक्षा की अगली पंक्ति में बैठने के कारण एक उच्च जाति के शिक्षक ने कथित तौर पर पीटा था।संभवत: अत्याचार की सबसे चौंकाने वाली घटना, जिसने देश भर में आक्रोश फैलाया था, पिछले महीने सीधी जिले से सामने आई थी, जब प्रवेश शुक्ला नाम के एक व्यक्ति को आदिवासी व्यक्ति के चेहरे पर पेशाब करते हुए फिल्माया गया था। शुक्ला मौजूदा भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के करीबी माने जाते हैं।पेशाब कांड के बाद क्षति की भरपाई के उपाय करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने भोपाल में अपने आवास पर पीड़ित (दशमत रावत) के पैर धोए, जबकि राज्य सरकार ने शुक्ला के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू किया, जिसका घर ध्वस्त कर दिया गया था।

भाजपा ने 2018 में रीवा जिले की सभी आठ विधानसभा सीटें और सतना जिले की सात में से चार सीटें जीतीं। सीधी और सिंगरौली में सात सीटें हैं, जिनमें से छह भाजपा ने 2018 में जीती थीं।चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस नेतृत्व ने दलित और आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाओं को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है।छतरपुर की ताजा घटना सामने आने के तुरंत बाद दलित समुदाय से आने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजरुन खड़गे और मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमल नाथ ने भाजपा सरकार की आलोचना की थी और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

खड़गे ने भाजपा के नारे सबका साथ-सबका विकास पर भी सवाल उठाए और इसे पीआर एक्सरसाइज करार दिया।उन्होंने सोमवार को ट्वीट किया, ’भाजपा का सबका साथ.. केवल विज्ञापनों तक सीमित एक पीआर स्टंट है। भाजपा बाबा साहेब अंबेडकर के सामाजिक न्याय के सपने को हर दिन चकनाचूर कर रही है। हम छतरपुर की घटना में दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।’’

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