नेशनल डेस्क: भारत में हाईवे यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूरत में देश का पहला बैरियर-फ्री टोल सिस्टम शुरू कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था चोर्यासी टोल प्लाजा पर लागू की गई है, जो नेशनल हाईवे 48 पर स्थित है।
क्या है नया टोल सिस्टम
यह सिस्टम ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। पहले जहां टोल देने के लिए बैरियर पर गाड़ी रोकनी पड़ती थी, वहीं अब गाड़ियां बिना रुके सीधे आगे बढ़ सकेंगी।
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कैसे काम करता है यह सिस्टम
इस नई तकनीक में टोल प्लाजा पर ऊपर की तरफ खास फ्रेम लगाए गए हैं, जिनमें सेंसर और कैमरे लगे होते हैं। जैसे ही कोई वाहन वहां से गुजरता है। कैमरे उसकी नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं। RFID रीडर FASTag को स्कैन कर लेते हैं। इसके बाद टोल की राशि अपने-आप वाहन मालिक के खाते से कट जाती है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया गया है, जिससे पहचान और भुगतान की प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाती है।
अगर FASTag न हो तो क्या होगा
अगर किसी वाहन में FASTag नहीं है या वह काम नहीं कर रहा, तब भी सिस्टम नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान कर लेता है। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित होता है और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है।
सरकार का उद्देश्य
इस नई व्यवस्था का मकसद टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करना और ट्रैफिक को सुचारु बनाना है। इसके जरिए समय की बचत होगी, ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण भी घटेगा। इस पहल की जानकारी लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट एंड अवार्ड्स 2026 के दौरान दी गई, जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह तकनीक भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
अगर यह सिस्टम सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे देश के अन्य हाईवे और टोल प्लाजा पर भी लागू किया जा सकता है। इससे पूरे देश में सफर और ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
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