नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को कहा कि भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और राज्य विधिज्ञ परिषदों के पास कानून के छात्रों का आचरण नियंत्रित करने की वैधानिक शक्ति नहीं है। कोर्ट ने साथ ही कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना संबंधित शिक्षण संस्थान का अधिकार है और वह अपने नियमों के अनुसार इस संबंध में फैसला ले सकता है। पीठ ने यह आदेश हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ बीसीआई की कार्रवाई से जुड़े विवाद की सुनवाई करते हुए दिया।
छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधान न्यायाधीश के शामिल होने पर आपत्ति जताई थी। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमारी राय है कि अधिविक्ता अधिनियम, 1961, जिसके तहत बीसीआई को कानूनी तौर पर बनाया गया है, बीसीआई या किसी भी राज्य बार काऊंसिल को विधि के छात्रों के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कोई स्पष्ट या निहित शक्ति नहीं देता है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, इस तरह की शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए, विधि स्नातक का उस अधिनियम के तहत वकील के तौर पर पंजीकरण होना जरूरी है।
जहां तक छात्रों की बात है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ उनके मूल संस्थान या उस संस्थान के नियमों/उप-नियमों के तहत तय प्राधिकार के पास ही होता है। पीठ ने नालसार विवाद के संबंध में बीसीआई द्वारा जारी दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। हालांकि, आलोचना के बाद बीसीआई ने दोनों अधिसूचनाएं जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले ली थीं।

