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Bihar Elections 2025: आखिर क्यों नहीं चला महागठबंधन का जादू, जानें पार्टियों ने कौनसी की गलती

November 15, 2025

Bihar Elections 2025: आखिर क्यों नहीं चला महागठबंधन का जादू, जानें पार्टियों ने कौनसी की गलती

नेशनल डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी (RJD) और महागठबंधन को बड़ी हार मिली है। तेजस्वी यादव अपनी पिछली जीत भी बचा नहीं पाए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस हार की कई वजह रही, जिन पर नीचे विस्तार से चर्चा की गई है।

यादव उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट देना
इस बार आरजेडी ने 52 यादव उम्मीदवार उतारे थे। इससे पार्टी की “केवल एक जाति वाली पार्टी” की छवि और मजबूत हो गई। इसी वजह से गैर-यादव वोट बैंक पार्टी से दूर चला गया और चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ।

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तेजस्वी यादव की 5 बड़ी गलतियां

  1. कांग्रेस से गठबंधन करना भारी पड़ा
    तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को साथ लेकर बड़ा जोखिम उठाया। कांग्रेस का बिहार में मजबूत आधार नहीं है। जहां कांग्रेस ने चुनाव लड़ा, वहीं उसने RJD के वोटों में ही सेंध लगा दी। कई सीटें कांग्रेस को देना RJD के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। इस वजह से गठबंधन का फायदा किसी को भी नहीं मिला।

 

  1. सीट बंटवारे में राहुल गांधी पर निर्भर रहना
    सीटों का बंटवारा करने के लिए तेजस्वी ने देर तक कांग्रेस नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्णय में देरी के कारण RJD जमीनी तैयारी नहीं कर पाई।कई मजबूत सीटें कांग्रेस को दे दी गईं, जहां RJD जीत सकती थी। इससे पार्टी का संगठन कमजोर हुआ और कार्यकर्ताओं में नाराज़गी बढ़ी।

 

  1. मुकेश सहनी को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व देना
    VIP पार्टी के नेता मुकेश सहनी को 10 से ज्यादा सीटें दी गईं और डिप्टी सीएम का पद भी ऑफर कर दिया गया। लेकिन उनका प्रभाव केवल कुछ इलाकों में ही सीमित है। इससे RJD का मुख्य वोट बैंक – यादव और मुस्लिम नाराज़ हो गया।

 

  1. असली मुद्दों से हटकर ‘वोट चोरी’ पर फोकस
    तेजस्वी यादव रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुख्य मुद्दों पर लगातार बात कर रहे थे, लेकिन चुनाव आते-आते उनका ध्यान ‘वोट चोरी’, ‘ईवीएम हैकिंग’ जैसे आरोपों पर चला गया। इससे जनता का ध्यान भटक गया और NDA ने इसे ऐसे दिखाया कि RJD हार मान चुकी है।

 

  1. महिलाओं की भारी वोटिंग ने बदला पूरा खेल
    इस चुनाव में महिलाएं रिकॉर्ड संख्या में वोट डालने पहुंचीं। नीतीश कुमार की लोकप्रिय योजनाएं, शराबबंदी, साइकिल योजना, छात्राओं के लिए सहायता, महिला आरक्षण ने महिलाओं में बड़ा असर छोड़ा। RJD का ’10 लाख नौकरी’ वाला वादा महिलाओं तक उतना प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया। ग्रामीण महिलाओं ने बड़ी संख्या में सुरक्षा और योजनाओं के नाम पर NDA को वोट दिया।

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राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी नहीं चली
चुनाव से कुछ हफ्ते पहले राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली। यह यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी और कई जिलों से होकर गुजरी। लेकिन नतीजों में जहां-जहां राहुल गांधी की यात्रा गई, वहां भी महागठबंधन बुरी तरह हार गया। सासाराम, गया, औरंगाबाद जैसे प्रमुख स्टॉप पर भी RJD और कांग्रेस को बड़ी हार मिली। यात्रा में भीड़ जरूर जुटी, लेकिन वोटों में उसका असर नहीं दिखा।

 

     महागठबंधन का सफाया

  • बिहार विधानसभा में कुल सीटें: 243
  • बहुमत का आंकड़ा: 122
  • NDA की सीटें: 202 (भारी जीत)
  • RJD की सीटें: 75 से घटकर 25
  • कांग्रेस की सीटें: 61 में से सिर्फ 6 (पिछली बार 19 थीं)

महागठबंधन को लगभग सभी क्षेत्रों में करारी हार मिली और जनता ने NDA पर भरोसा जताया।

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