नई दिल्ली। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर उपयोग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर को अनिवार्य धार्मिक प्रक्रिया के रूप में निर्धारित नहीं किया गया है।
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गोंडिया जिले स्थित गौसिया मस्जिद की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। मस्जिद प्रबंधन ने प्रतिबंध हटाने और लाउडस्पीकर उपयोग दोबारा शुरू करने का अनुरोध किया था। अदालत ने याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णय को ही आधार बनाया।
अदालत ने कहा कि मस्जिद पक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनसे साबित हो कि नमाज के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग धार्मिक तौर पर अनिवार्य है। कोर्ट के अनुसार, कोई धर्म पूजा के दौरान संगीत उपकरणों या ऊँची ध्वनि से शांति भंग करने की सलाह नहीं देता।
नागपुर बेंच ने 16 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को सबूत लाने का निर्देश दिया था। अदालत के अनुसार, तय समय के भीतर ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए जिनकी कानूनी मान्यता हो।
हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत लाउडस्पीकर से उत्पन्न शोर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अनचाहे ध्वनि सुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

