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विधानसभा चुनाव: बूथों पर BSF की बढ़ी जिम्मेदारी, पहचान जांच से लेकर CCTV निगरानी तक संभालेंगे जवान

Assembly Elections 2026

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नेशनल डेस्क: आगामी विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों को इस बार मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी गई हैं। उन्हें वोटिंग बूथ पर मतदाताओं के पहचान पत्र की जांच करने के साथ-साथ वहां लगे CCTV कैमरों की निगरानी भी करनी होगी।

हर बूथ पर तैनात होंगे BSF के जवान

निर्देशों के अनुसार, हर मतदान केंद्र पर BSF के एक पुरुष और एक महिला जवान की तैनाती की जाएगी। इनका मुख्य काम मतदान के दौरान आने वाले मतदाताओं के पहचान पत्र की जांच करना होगा, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

CCTV कैमरों की जिम्मेदारी भी BSF के पास

मतदान केंद्रों पर लगे CCTV कैमरों का नियंत्रण भी BSF के जवानों को दिया गया है। इसके लिए अलग से जवान तैनात किए जाएंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हैं। साथ ही वे कैमरों की लाइव फीड पर भी नजर रखेंगे, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बड़े पैमाने पर केंद्रीय बलों की तैनाती

असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए करीब ढाई से तीन लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। इनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है।

अधिकारियों के तबादले के निर्देश

BSF ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के ऐसे अधिकारी उन्हें तुरंत प्रभाव से बदला जाए, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में इन राज्यों में ड्यूटी की थी सभी यूनिट्स को ऐसे अधिकारियों की सूची बनाकर जल्द से जल्द बदलाव करने को कहा गया है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस फैसले को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि BSF द्वारा दिए गए ये निर्देश चुनाव आयोग की तय प्रक्रियाओं के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं के पहचान पत्र की जांच का काम आमतौर पर चुनाव अधिकारियों का होता है, न कि अर्धसैनिक बलों का। CCTV की निगरानी का जिम्मा BSF को देना चुनाव आयोग की भूमिका में दखल के समान है।

चुनाव में पारदर्शिता बनाम अधिकारों पर बहस

एक ओर जहां सुरक्षा एजेंसियां इन कदमों को चुनाव को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी बता रही हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में देख रहा है। ऐसे में यह मुद्दा चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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