नई दिल्ली: केंद्र सरकार हर साल बजट के जरिए यह तय करती है कि देश की अर्थव्यवस्था को कैसे आगे बढ़ाया जाएगा और किन योजनाओं पर कितना खर्च होगा। लेकिन बजट का एक अहम पहलू यह भी होता है कि सरकार के पास यह पैसा आता कहां से है। सरकार की आमदनी कई अलग-अलग स्रोतों से होती है, जिनमें टैक्स, नॉन-टैक्स इनकम, उधारी और पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। इन्हीं संसाधनों के सहारे सरकार विकास और जनकल्याण की योजनाओं को अमल में लाती है।
टैक्स से होती है सबसे ज्यादा कमाई
सरकार की आय का सबसे बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है। टैक्स को दो श्रेणियों में बांटा जाता है डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स। डायरेक्ट टैक्स के अंतर्गत इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स आते हैं, जो नागरिकों और कंपनियों की कमाई पर लगाए जाते हैं।
वहीं इनडायरेक्ट टैक्स वस्तुओं और सेवाओं पर वसूला जाता है। इसमें जीएसटी (GST) सबसे प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और शराब जैसे उत्पादों पर लगने वाला उत्पाद शुल्क (Excise Duty) भी सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व उपलब्ध कराता है। टैक्स व्यवस्था का मकसद केवल आय जुटाना ही नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन बनाए रखना भी होता है।
नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी देता है सहारा
टैक्स के अलावा सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू से भी अच्छी खासी आमदनी होती है। इसमें सरकारी सेवाओं से मिलने वाली फीस, जुर्माने, पेनल्टी और लाइसेंस शुल्क शामिल होते हैं।
इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) सरकार को डिविडेंड के रूप में आय देती हैं। रेलवे, डाक विभाग, सरकारी बैंक और अन्य सरकारी उपक्रम इस श्रेणी में आते हैं।
सरकार प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोयला, खनिज, टेलीकॉम स्पेक्ट्रम आदि की नीलामी के जरिए भी फंड जुटाती है। भले ही यह आय टैक्स के मुकाबले कम हो, लेकिन बजट में इसकी भूमिका अहम रहती है।
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जरूरत पड़ने पर सरकार लेती है कर्ज
जब सरकारी खर्च आय से अधिक हो जाता है, तब उधारी एक विकल्प बनती है। सरकार देश के भीतर बैंकों, बीमा कंपनियों और आम लोगों से सरकारी बॉन्ड और ट्रेजरी बिल के जरिए कर्ज लेती है। छोटी बचत योजनाएं भी सरकार के लिए फंड जुटाने का बड़ा माध्यम हैं।
इसके अलावा सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और विदेशी देशों से भी ऋण ले सकती है। वहीं सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को विनिवेश कहा जाता है, जो पूंजीगत प्राप्तियों का हिस्सा होती है।
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इन्हीं संसाधनों से चलता है विकास का पहिया
टैक्स, नॉन-टैक्स इनकम, उधारी और विनिवेश जैसे स्रोतों से जुटाए गए फंड के जरिए ही सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाती है। बजट न केवल खर्चों का लेखा-जोखा होता है, बल्कि यह सरकार की आर्थिक रणनीति और भविष्य की दिशा भी तय करता है।

