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भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें, कनाडा में शरण नियम हुए सख्त

canada asylum law

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इंटरनेशनल डेस्क: कनाडा में 2025 के पहले छह महीनों के दौरान भारत के लगभग 9,770 लोगों ने शरण के लिए आवेदन किया है। इनमें बड़ी संख्या पंजाब से जुड़े लोगों की बताई जा रही है। इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए कनाडा सरकार ने शरण प्रक्रिया को सख्त बनाने के लिए नया कानून लागू कर दिया है।

नया कानून क्या है?

कनाडा सरकार ने Strengthening Canada Immigration System and Borders Act (बिल C-12) लागू किया है। इसे 26 मार्च को शाही मंजूरी (Royal Assent) मिलने के बाद लागू कर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य शरण प्रक्रिया को तेज, आसान और ज्यादा नियंत्रित बनाना है, लेकिन इसके कुछ नियमों को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है।

किन नियमों में बदलाव हुआ?

Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) के अनुसार, इस कानून में चार बड़े बदलाव किए गए हैं…

शरण मांगने की पात्रता के नियम बदले गए

प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया गया

सरकारी विभागों के बीच जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत की गई

सरकार को इमिग्रेशन दस्तावेजों पर अधिक अधिकार दिए गए

समय सीमा में बड़ा बदलाव

इस नए कानून का सबसे ज्यादा असर समय-सीमा (deadline) पर पड़ेगा। 3 जून 2025 के बाद किए गए आवेदन नए नियमों के तहत आएंगे। अगर कोई व्यक्ति 24 जून 2025 के बाद कनाडा आता है और 1 साल बाद शरण मांगता है, तो उसका केस आमतौर पर पूरी सुनवाई के लिए Immigration and Refugee Board of Canada (IRB) में नहीं भेजा जाएगा। यह 1 साल की अवधि दोबारा प्रवेश करने पर भी रीसेट नहीं होगी।

अनियमित तरीके से आने वालों के लिए नियम

अगर कोई व्यक्ति अमेरिका से कनाडा में बिना आधिकारिक बॉर्डर (illegal entry) से आता है और 14 दिनों के भीतर शरण के लिए आवेदन नहीं करता, तो उसे भी पूरी सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा।  सरकार का कहना है कि इससे शरण प्रणाली के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में शरण मांगने वालों में भारतीय नागरिक सबसे आगे हैं। भारत ने मैक्सिको और हैती जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। दिसंबर 2012 से अब तक 45,000 से ज्यादा भारतीय कनाडा में शरण के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें पंजाब से जुड़े मामलों की संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है।

सरकार का पक्ष

Public Safety Canada के अनुसार, इस कानून से सीमा सुरक्षा मजबूत होगी। फेंटानिल तस्करी जैसे अपराधों पर रोक लगेगी। पुलिस और एजेंसियों को ज्यादा ताकत मिलेगी। केंद्र और प्रांतों के बीच जानकारी साझा करना आसान होगा।

क्यों हो रही है आलोचना?

Canadian Council for Refugees ने इस कानून की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे शरणार्थियों की सुरक्षा कमजोर हो सकती है।कई लोगों को पूरी सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और कनाडा के मानवाधिकार वादों के खिलाफ हो सकता है।

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