नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप भारतीय रक्षा संपदा सेवा को अब केवल भूमि प्रबंधन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छावनी क्षेत्रों को स्मार्ट, हरित और सतत शहरी इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना होगा। गुरुवार को ‘मंथन 2025’ राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में रक्षा संपदा सेवा की अहम भूमिका होगी। यह न केवल रक्षा भूमि की सुरक्षा और प्रबंधन करेगी, बल्कि छावनियों में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाएगी।
सिंह ने कहा कि ई-छावनी 2.0 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाते हुए इसमें एआई-आधारित शिकायत निवारण, बहुभाषी सेवाएं और स्मार्ट हेल्थ सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए। साथ ही समाज के कमजोर वर्गों, गरीबों, दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष बच्चों के कल्याण पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि ई-कनेक्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे व्यवसायियों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए सभी लाइसेंस और अनुमतियों की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि छावनी बोडरें को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह संस्थान बनना होगा।
इसके लिए वित्तीय स्वायत्तता और सात स्तंभों पर आधारित सुधारों पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा संपदा सेवा सेनाओं के साथ मिलकर 17 लाख एकड़ से अधिक रक्षा भूमि का प्रबंधन करती है, जो न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि नागरिकों के जीवन से भी सीधा जुड़ा हुआ है। इसीलिए इसकी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में निरंतर सुधार जरूरी हैं।
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