नई दिल्ली। बांग्लादेश में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र की बेरहमी से हत्या के बाद भारत में गुस्सा देखने को मिल रहा है। इस घटना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे।
कई कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में
सोमवार सुबह करीब 11 बजे से VHP कार्यकर्ता दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर इकट्ठा हुए। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। दिल्ली के अलावा कोलकाता, भोपाल और जम्मू समेत कई शहरों में भी दीपू की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस का पुतला भी जलाया।
बांग्लादेश ने भारतीय हाई कमिश्नर को तलब किया
बांग्लादेश सरकार ने भारत के हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा को विदेश मंत्रालय बुलाया। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है जब उन्हें तलब किया गया है। बैठक में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर भी मौजूद थे। बांग्लादेश के विदेश सचिव असद अल सियाम ने भारत में स्थित बांग्लादेशी मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।
#WATCH दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों और दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश हाई कमीशन के पास विरोध प्रदर्शन किया। pic.twitter.com/IUr5KyNrFv
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 23, 2025
18 दिसंबर की रात दीपू चंद्र की हुई थी हत्या
18 दिसंबर की रात बांग्लादेश में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र की हत्या कर दी गई। शुरुआत में यह कहा गया कि दीपू ने फेसबुक पर कोई आपत्तिजनक धार्मिक पोस्ट की थी, लेकिन जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। इसके बावजूद भीड़ ने उसे निशाना बनाया।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता
इस घटना के बाद बांग्लादेश में रह रहे भारतीय नागरिकों, खासकर मेडिकल छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत में लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए।
दो दिन पहले भी हुआ था प्रदर्शन
20 दिसंबर को भी दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर एक छोटा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इसमें सिर्फ 20–25 लोग शामिल थे और सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था।
बांग्लादेश में भी दीपू के लिए न्याय की मांग
22 दिसंबर को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में नेशनल प्रेस क्लब के बाहर हिंदू संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दीपू पूरी तरह निर्दोष था और उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया। उनका आरोप है कि कट्टरपंथियों ने दीपू को पहले पीटा, फिर पेड़ से लटकाया और बाद में जिंदा जला दिया।
अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों का आरोप
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बांग्लादेश में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इस साल जनवरी से अब तक 50 से ज्यादा गैर-मुस्लिमों की हत्या हो चुकी है और कई लोगों पर झूठे ईशनिंदा के मामले दर्ज किए गए हैं।
फैक्ट्री विवाद बना हत्या की वजह
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, दीपू चंद्र एक गारमेंट फैक्ट्री (पायनियर निटवेयर्स) में फ्लोर मैनेजर थे। वे हाल ही में सुपरवाइजर पद के लिए परीक्षा दे चुके थे। फैक्ट्री के सीनियर मैनेजर के मुताबिक, कुछ वर्कर्स ने दीपू पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। दीपू के भाई अपू चंद्र दास ने बताया कि फैक्ट्री में काम, टारगेट और सुविधाओं को लेकर पहले से विवाद चल रहा था।
जबरन इस्तीफा और फिर भीड़ के हवाले
18 दिसंबर को विवाद बढ़ने के बाद फैक्ट्री मैनेजमेंट ने दीपू से जबरन इस्तीफा दिलवाया और उसे बाहर निकाल दिया। इसके बाद उसे भीड़ के हवाले कर दिया गया। परिवार को पहले बताया गया कि दीपू को पुलिस स्टेशन ले जाया गया है, लेकिन थोड़ी देर बाद खबर मिली कि उसकी मौत हो चुकी है। जब परिवार मौके पर पहुंचा, तो दीपू का शव जला हुआ मिला।
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