नेशनल डेस्कः चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताने की हिमाकत की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को बयान देते हुए एक बार फिर दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलना चीन की संप्रभुता के दायरे में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है।
भारत ने चीन के इस दावे को खारिज कर दिया था, जिससे मिर्ची लगना तो तय था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 12 अप्रैल को चीन की इस हरकत को दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने के प्रयासों को कमजोर करने वाला बताया था।
दरअसल, चीन ने 10 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश की कुछ जगहों के नाम जारी करने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह की हरकतें भ्रामक और निरर्थक हैं और भारत इन्हें पूरी तरह अस्वीकार करता है। चीन का यह कदम गलत और बिना आधार का है। अरुणाचल प्रदेश हमेशा से देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है और रहेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि वर्तमान में चीन-भारत संबंध आम तौर पर स्थिर हैं। बीजिंग की भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने और विकसित करने की नीति अपरिवर्तित है।
बता दें यह मामला भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का एक और पहलू है, जो दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। चीन द्वारा अपने नक्शे में भारतीय क्षेत्रों को शामिल करने और उनके नाम बदलने की बात हमेशा कही गई है, लेकिन भारत ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग बताता रहा है।
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