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Haryana News : महिला का शव ले जाने पर भिड़े, हाथपाई और सड़क जाम

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फतेहाबाद। रतिया क्षेत्र के गांव बबनपुर ढाणी में 40 वर्षीय विवाहिता तरनजीत कौर की कथित आत्महत्या के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए मायका और ससुराल पक्ष आमने-सामने आ गए।

दोनों पक्षों के बीच हाथापाई

इस जिद में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और सड़क जाम करने तक की नौबत आ गई। बढ़ते तनाव और हंगामे को देखते हुए पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा। आखिरकार प्रशासन की देखरेख में श्मशान का गेट बंद कराकर पुलिस के पहरे में अंतिम संस्कार कराया। ससुराल पक्ष ने किया फतेहाबाद-बुढ़लाडा हाईवे जाम वीरवार सुबह जब मायका पक्ष तरनजीत कौर के शव को एम्बुलेंस में डालकर अपने गांव बरे, मानसा, पंजाब ले जाने लगा, तो ससुराल पक्ष के लोगों ने एम्बुलेंस को घेर लिया और फतेहाबाद-बुढ़लाडा स्टेट हाईवे पर जाम लगा दिया।

समझाने पर भी नहीं माने लोग 

सदर और शहर थाना प्रभारियों के समझाने पर भी लोग नहीं माने और पुलिस पर मायका पक्ष से मिले होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। बाद में मौके पर पहुंचीं एएसपी दिव्यांशी सिंगला के हस्तक्षेप और प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर अंतिम संस्कार करवाने के आश्वासन के बाद ससुराल पक्ष शांत हुआ और जाम खोला गया। मायका पक्ष ने श्मशान घाट के रास्ते पर दिया धरना ससुराल पक्ष के शांत होने के बाद जब प्रशासन शव को नागरिक अस्पताल के सामने स्थित बुढलाडा रोड रामबाग ले जाने लगा तो मायका पक्ष के लोग रास्ते पर बैठ गए।

पुलिस और मायका पक्ष में धक्का-मुक्की

इस दौरान पुलिस और मायका पक्ष के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई। मृतका के भाई अवतार सिंह ने दावा किया कि उसकी बहन की अंतिम इच्छा थी कि उसका अंतिम संस्कार उसके मायके गांव बरे में ही हो। मायका पक्ष का स्पष्ट कहना था कि उनकी बेटी को प्रताड़ित कर मारा गया है, इसलिए वे शव ससुराल वालों को नहीं सौंपेंगे। पुलिस ने गेट बंद कर करवाया अंतिम संस्कार हंगामे को बेकाबू होता देख पुलिस प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया। भारी पुलिस बल ने धरना दे रहे मायका पक्ष के लोगों को वहां से खदेड़ा और शव को तुरंत श्मशान घाट के अंदर ले जाकर मुख्य गेट बंद कर दिया।

नारेबाजी करते रहे लोग

तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस ने मायके और ससुराल पक्ष के कुछ ही लोगों को अंदर बुलाया और मृतका के बेटे तथा भाई के हाथों अंतिम क्रिया संपन्न करवाई। बाहर दोनों पक्ष पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करते रहे, लेकिन संस्कार पूरा होने के बाद लोग वहां से चले गए और प्रशासन ने राहत की सांस ली।

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