Last Updated: September 23, 2026

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शादी का वादा टूटने पर सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं- कलकत्ता हाईकोर्ट

February 18, 2026

शादी का वादा टूटने पर सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं- कलकत्ता हाईकोर्ट

नेशनल डेस्क: कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि दो बालिग लोगों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने हों और बाद में शादी न हो पाए या रिश्ता टूट जाए, तो केवल इसी आधार पर उसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि शुरू से ही आरोपी का इरादा धोखा देने का था और उसने झूठे वादे के जरिए महिला को संबंध बनाने के लिए राजी किया। यह फैसला जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) की पीठ ने सुनाया। अदालत ने 16 फरवरी को आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया।

क्या था मामला?

महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में जबरन गर्भपात भी कराया। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर संबंध बनाए, लेकिन वह इसलिए चुप रही क्योंकि आरोपी ने उससे शादी करने का भरोसा दिया था।

बता दें महिला और आरोपी का रिश्ता वर्ष 2017 में शुरू हुआ था और 2022 तक चलता रहा। इस दौरान दोनों कई जगह घूमने गए, साथ रहे और कई होटलों में पति-पत्नी की तरह ठहरे। अदालत में यह भी सामने आया कि महिला गर्भवती हुई थी और दोनों की सहमति से गर्भपात कराया गया था।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे। यदि महिला को शुरुआत से ही किसी प्रकार का धोखा महसूस होता, तो वह पहले ही शिकायत कर सकती थी। लेकिन पांच-छह वर्षों तक रिश्ता जारी रहना इस बात का संकेत देता है कि संबंध सहमति से थे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल शादी का वादा पूरा न होने से यह नहीं माना जा सकता कि शुरुआत से ही आरोपी का इरादा गलत था। दुष्कर्म का मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही झूठ बोलकर या धोखे से महिला को शारीरिक संबंध के लिए मजबूर किया।

कब दर्ज हुआ केस?

महिला ने आरोप लगाया कि 2022 में जब आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया, तब उसने पश्चिम मिदनापुर में 16 फरवरी 2022 को मामला दर्ज कराया। इसके बाद 23 फरवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता और आरोपी के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया।

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