
नेशनल डेस्क: दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाट के किनारे बनी बस्तियों पर गुरुवार से दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। भारी पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजरों की मदद से मकानों को गिराया गया। सुबह से ही छह से अधिक बुलडोजर लगातार कार्रवाई में लगे रहे। इस दौरान इलाके में रहने वाले लोगों के चेहरों पर मायूसी, भविष्य की चिंता और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी साफ दिखाई दी।
दरअसल, डीडीए और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने पिछले महीने इन बस्तियों को खाली करने का नोटिस जारी किया था। प्रभावित लोगों ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और लोगों को तय समय के भीतर जगह खाली करने के निर्देश दिए।
कार्रवाई की आशंका को देखते हुए कई परिवारों ने करीब एक सप्ताह पहले ही अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था। कुछ लोग दिल्ली के दूसरे इलाकों में किराए के मकान तलाशकर वहां चले गए और कई परिवार अंतिम समय तक अपने घरों में डटे रहे। बुलडोजर चलते समय कुछ लोग अपने सामान को बचाने में लगे थे, तो कई लोग अपने घरों को टूटते हुए बेबसी से देखते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों के आसपास बनी 300 से अधिक झुग्गियां और मकान तोड़ दिए गए हैं। इस कार्रवाई से एक हजार से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। कई परिवारों के सामने अब रहने की सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन ने 1 मई को आपदा प्रबंधन कानून (डीएमए एक्ट) के तहत नोटिस जारी किया था। इसके बाद 15 मई को डीडीए ने भी नोटिस देकर 15 दिनों के भीतर क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए थे। डीडीए का कहना है कि यह इलाका यमुना के ओ-जोन (फ्लडप्लेन) में आता है, जहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नियमों के खिलाफ है। यह क्षेत्र बाढ़ के दौरान पानी के फैलाव के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
प्रशासन का अनुमान है कि यह अभियान अगले कुछ दिनों तक और जारी रह सकता है। इस वजह से इलाके में रहने वाले पंडे, नाव चलाने वाले, गोताखोर, बाल काटने का काम करने वाले और किरायेदार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनके बजट में आसपास कहीं किराए पर मकान उपलब्ध नहीं है। हालांकि प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आश्रय गृह की व्यवस्था करने की बात कही है।
करीब 20 वर्षों से इस इलाके में रह रहे बिजली मैकेनिक नागेंद्र मिश्रा ने बताया कि उनका तीन कमरों का घर पूरी तरह टूट गया। उनका कहना है कि अब परिवार के साथ आश्रय गृह में रहना आसान नहीं है, क्योंकि उनकी बेटियां वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। आसपास के इलाकों में इतना बड़ा मकान किराए पर लेने के लिए कम से कम 12 से 15 हजार रुपये प्रति माह खर्च करने होंगे, जो उनकी आय के हिसाब से काफी ज्यादा है।
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