कुरुक्षेत्र। अदालत ने शाहाबाद के मीरी पीरी मेडिकल इंस्टिट्यूट और रिसर्च सेंटर की सेवा संभाल का मामला हरियाणा कमेटी के पक्ष में आ गया है। फैसले के बाद प्रधान जगदीश झींडा समर्थकों के साथ मीरी-पीरी संस्थान पहुंचे।
इस मामले में आगे आकर अदालत में लड़ने वाले पूर्व प्रधान बलजीत दादूवाल समर्थकों सहित एचएसजीएमसी मुख्यालय आ रहे हैं। यहीं से रणनीति बनाकर संस्थान की सेवा संभाल के लिए निकल सकते हैं। इससे पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में आठ मई को सुनवाई के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था। फैसले से एक दिन पहले ही एचएसजीएमसी मुख्यालय में हलचल शुरू हो गई थी। सोमवार शाम को ही प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने अपने समर्थकों के साथ बंद कमरे में बैठक की थी। इसके बाद कई कर्मचारियों को सुबह ही शाहाबाद पहुंचने के निर्देश भी दिए थे।
हरियाणा के हक में फैसला आने के बाद एचएसजीएमसी मुख्यालय पहुंच धर्म प्रचार कमेटी चेयरमैन बलजीत सिंह दादूवाल ने मिठाई बांटी। गौरतलब है की एचएसजीएमसी का गठन के बाद से ही हरियाणा में एसजीपीसी की संपत्ति और सभी गुरुद्वारों पर हरियाणा कमेटी अपना हक जता रही है। सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा कमेटी के हक में फैसला आने के बाद एचएसजीएमसी ने प्रदेश के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा संभाल ली थी। उसी दिन से शाहाबाद के मीरी पीरी मेडिकल संस्थान की सेवा संभाल को लेकर एचएसजीएमसी और एसजीपीसी आमने-सामने हैं।
इससे पहले 20 मार्च को एचएसजीएमसी धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन बलजीत सिंह दादूवाल अपने समर्थकों सहित मीरी-पीरी संस्थान पहुंच गए थे। वहां दोनों धड़ों के आमने-सामने होने पर विवाद हो गया था। इस विवाद के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दादूवाल समर्थकों को सुरक्षा घेरे में संस्थान से बाहर निकाला था। इसी विवाद में एसजीपीसी के कई समर्थकों पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया था। एचएसजीएमसी के वरिष्ठ उपप्रधान गुरमीत सिंह ने आज भी प्रधान जगदीश सिंह झींडा पर पंजाब के बादल परिवार और एसजीपीसी पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
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