नेशनल डेस्कः रूस-यूक्रेन युद्ध और हाल ही में इजरायल-ईरान संघर्ष ने पूरी दुनिया को यह समझा दिया है कि केवल पेट्रोल और डीजल पर निर्भर रहना भविष्य के लिए सुरक्षित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ता है।
इसी चुनौती को देखते हुए भारत सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दे रही है। अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन को कानूनी मान्यता देने की मंजूरी दे दी है। इससे देश में स्वच्छ, सस्ता और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाला ईंधन इस्तेमाल करने का रास्ता और आसान हो जाएगा।
नितिन गडकरी ने की बड़ी घोषणा
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को औपचारिक रूप से अनुमति देने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है।

अब सरकार इसके लिए आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश तैयार करेगी, जिन्हें बाद में सार्वजनिक किया जाएगा। गडकरी ने कहा कि इस फैसले से देश के पेट्रोलियम आयात पर होने वाला भारी खर्च कम करने में मदद मिलेगी।
पेट्रोलियम आयात पर हर साल होता है भारी खर्च
नितिन गडकरी के अनुसार भारत हर साल बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद विदेशों से खरीदता है। इस पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का खर्च आता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इस आयात को धीरे-धीरे कम करना है। भविष्य में देश में अधिक गैस का उत्पादन होगा और पेट्रोल-डीजल के प्रभावी विकल्प भी उपलब्ध होंगे। इससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।
ऑटोमोबाइल कंपनियां भी कर रही हैं तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाहन निर्माता कंपनियां भी बदलती जरूरतों के अनुसार नई तकनीक विकसित कर रही हैं। हाल ही में मारुति सुजुकी ने 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाली वैगनआर का मॉडल पेश किया है। इसके अलावा दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियां भी इस दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।
अब तक कुल पांच ऐसी मोटरसाइकिलें लॉन्च की जा चुकी हैं जो इथेनॉल आधारित ईंधन पर चल सकती हैं। इनमें से तीन मॉडल हीरो मोटोकॉर्प के हैं और दो अन्य कंपनियों द्वारा पेश किए गए हैं।
जल्द आएंगी नई इथेनॉल कारें
गडकरी ने कहा कि आने वाले दो महीनों के भीतर टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी प्रमुख वाहन कंपनियां भी 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाली नई गाड़ियां बाजार में उतार सकती हैं।इससे ग्राहकों के पास पेट्रोल और डीजल के अलावा एक नया विकल्प उपलब्ध होगा, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है।
इथेनॉल को लेकर फैलाई गईं कई गलत जानकारियां
नितिन गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने का विचार रखा था, तब कई लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था। कुछ लोगों ने इथेनॉल के बारे में गलत जानकारी फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की भी कोशिश की।
उनका कहना था कि नई तकनीक और नए ईंधन के बारे में अक्सर अफवाहें फैलती हैं, लेकिन समय के साथ सही जानकारी लोगों तक पहुंचती है और तकनीक को स्वीकार्यता मिलती है।
गडकरी ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गडकरी ने एक पुराना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने उन्हें फोन कर कहा कि उसकी जीप खराब हो गई है। जब वह वाहन को मैकेनिक के पास ले गया तो उसे बताया गया कि इथेनॉल डालने की वजह से गाड़ी खराब हुई है। इस पर गडकरी ने उस व्यक्ति से पूछा कि उसकी जीप पेट्रोल पर चलती है या डीजल पर। व्यक्ति ने जवाब दिया कि वाहन डीजल इंजन वाला है।
गडकरी ने कहा कि डीजल में इथेनॉल मिलाया ही नहीं जाता, इसलिए इथेनॉल के कारण वाहन खराब होने का सवाल ही नहीं उठता। इस उदाहरण से उन्होंने बताया कि इथेनॉल के खिलाफ कई बार बिना तथ्यों के गलत बातें फैलाई जाती हैं।
क्या होगा इस फैसले का फायदा
-पेट्रोल और डीजल के आयात पर खर्च कम होगा।
-किसानों को इथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
-देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।
-विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी।
-पर्यावरण को कम नुकसान होगा।
-ईंधन की वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत होगी।
मेष: दिन शुभ रहेगा...