Dhirendra Shastri: बांग्लादेश में प्रस्तावित चुनाव से करीब दो महीने पहले राजनीतिक और सामाजिक हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन से जुड़े नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी है। हाल के दिनों में हालात ऐसे बने हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदू आबादी, असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।
विभिन्न इलाकों से सामने आई घटनाओं के बाद बांग्लादेश सरकार पर कानून-व्यवस्था संभालने में नाकामी के आरोप लग रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन घटनाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है और मानवाधिकार संगठनों की नजर हालात पर बनी हुई है।
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बागेश्वर बाबा ने जताई चिंता
इसी बीच भारत में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वहां केवल अपनी पहचान के कारण हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने समाज से एकजुट रहने और संस्कारों को मजबूत करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुंबई के अंधेरी इलाके में बागेश्वर धाम का एक कार्यालय खोला जाएगा। साथ ही महाराष्ट्र में धार्मिक आयोजनों और राज्य द्वारा लिए गए कुछ फैसलों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
हादी की मौत के बाद बिगड़े हालात
शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद से देश के कई हिस्सों में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। हालात इस कदर बिगड़े कि कुछ जगहों पर भीड़ की हिंसा ने मासूम लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इन घटनाओं के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल है और कई परिवारों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
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सूत्रों के मुताबिक, हादी के अंतिम संस्कार के बाद कट्टरपंथी समूहों की ओर से प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिशें भी की गईं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए।
चुनावी माहौल और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। देश में करीब 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा हिंदू रहते हैं, जो पहले से ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते अल्पसंख्यकों पर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।फिलहाल सभी की निगाहें बांग्लादेश सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे हालात को कैसे काबू में लाती हैं और अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

