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25 साल पुराना सपना होगा पूरा, इस तारीख को योगी सरकार कर सकती है जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन

jewar international airport

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नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के जेवर में करीब 25 साल पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है। साल 2001 में उस समय के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां एक ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद अप्रैल 2003 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इसकी तकनीकी और व्यवहार्यता रिपोर्ट को मंजूरी भी दे दी थी। लेकिन कई वर्षों तक यह परियोजना अटकी रही और अलग-अलग सरकारों के दौरान इसे दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करने की भी कोशिशें हुईं, जिससे काम आगे नहीं बढ़ सका।

करीब 16 साल तक यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। फिर 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार और 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद इस परियोजना ने तेजी पकड़ी। सरकारों के संयुक्त प्रयास से अब यह एयरपोर्ट लगभग तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही शुरू करने की दिशा में काम पूरा किया जा रहा है। 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया जा सकता है।

यह एयरपोर्ट कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा होगा। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से इसकी दूरी लगभग 72 किलोमीटर है। वहीं बुलंदशहर से 36 किलोमीटर, नोएडा से करीब 60 किलोमीटर, फरीदाबाद से लगभग 31 किलोमीटर और गाजियाबाद से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़े होने के कारण मथुरा, आगरा, अलीगढ़ और वृंदावन जैसे शहरों से यात्री करीब एक से डेढ़ घंटे में यहां पहुंच सकेंगे।

एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में लगभग 1334 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया गया है। दूसरे चरण में 1365 हेक्टेयर और तीसरे व चौथे चरण में करीब 2054 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार होगा। पूरी परियोजना के पूरा होने पर यहां कुल 5 रनवे बनाए जाएंगे, जो इसे देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगा।

शुरुआती योजना के अनुसार, साल 2007-08 तक इसे लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाना था, लेकिन यूपीए सरकार के दौरान इस परियोजना को रोक दिया गया था। उस समय यह तर्क दिया गया कि यह एयरपोर्ट दिल्ली के मौजूदा एयरपोर्ट के बहुत करीब है। जीएमआर ग्रुप ने भी इस योजना का विरोध किया था, क्योंकि इससे उनके संचालन और राजस्व पर असर पड़ने की आशंका थी।

इस परियोजना का सफर काफी लंबा रहा है। 2001 में प्रस्ताव रखा गया, 2008 में मायावती ने इसे फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश की। 2012 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान इसे फिरोजाबाद शिफ्ट करने की योजना बनी, जबकि 2014 में आगरा के एत्मादपुर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव दिया गया। अंततः 2017 में फिर से जेवर को ही अंतिम स्थान के रूप में चुना गया।

एयरपोर्ट की क्षमता भी चरणों के साथ बढ़ेगी। पहले चरण में यह हर साल करीब 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा, जो चौथे चरण तक बढ़कर 7.2 करोड़ हो जाएगी। उड़ानों की संख्या भी एक लाख से बढ़कर पांच लाख प्रति वर्ष तक पहुंचने की योजना है। रनवे की लंबाई और टर्मिनल का आकार भी लगातार बढ़ाया जाएगा, जिससे यहां बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय संचालन संभव हो सकेगा।

मई 2018 में केंद्र सरकार से इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली। नवंबर 2019 में स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को 40 साल के लिए निर्माण और संचालन का ठेका दिया गया। 2020 में जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हुआ और 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया। 2026 में डीजीसीए द्वारा इसे एयरोड्रम लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है।

इस परियोजना को यमुना प्राधिकरण द्वारा सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में कुल पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हो जाएंगे, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

राजनीतिक स्तर पर भी इस परियोजना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि यह एयरपोर्ट राज्य और देश के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा और विपक्ष का कहना है कि अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं है और इसका उद्घाटन जल्दबाजी में किया जा रहा है। वहीं स्थानीय किसानों ने मुआवजा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं भी जताई हैं।

 

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