चंडीगढ़। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और जजपा नेता दुष्यंत चौटाला और पुलिस का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। दुष्यंत चौटाला ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही जांच सीबीआई या चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस से कराने की मांग की है।
याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। याचिका में कहा है कि 17 अप्रैल 2026 को हिसार में उनके काफिले को बोलेरो ने रोक लिया। सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर पवन कुमार ने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को धमकाया। दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट को बताया कि वह वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत संरक्षित हैं, बावजूद इसके इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर है।
याचिका के अनुसार उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए अलग-अलग शिकायतें दी हैं, जिनमें जान से मारने की धमकी तक का जिक्र है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस घटना के बाद हरियाणा पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उलटा उनके परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। खास तौर पर 7 अप्रैल की एक घटना को आधार बनाकर दर्ज एफआईआर को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया है।
दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट के समक्ष यह भी दलील दी कि घटना के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की गई। इसके विपरीत, मामले को दबाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका जताई गई है। याचिका में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और सभी संबंधित रिकॉर्ड संरक्षित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस की भूमिका संदिग्ध है और निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की आवश्यकता बताई है।
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