Last Updated: September 21, 2026

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भारत में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग, जानें कितनी थी तीव्रता

March 20, 2026

भारत में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग, जानें कितनी थी तीव्रता

Earthquake News : शुक्रवार तड़के गंगटोक में भूकंप के दो हल्के झटके महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार, ये झटके सुबह-सुबह आए, जिससे लोगों में थोड़ी घबराहट जरूर हुई, लेकिन किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। पहला भूकंप सुबह 4:26 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 थी। इसका केंद्र गंगटोक से लगभग 10.7 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में और सिर्फ 5 किलोमीटर की कम गहराई पर था। दूसरा झटका इससे कुछ देर बाद आया, जिसकी तीव्रता 2.7 थी। इसका केंद्र शहर से करीब 11.2 किलोमीटर पश्चिम में और 10 किलोमीटर की गहराई पर था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, दोनों भूकंप हल्के थे और किसी के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

भूकंप क्यों आते हैं?
धरती के अंदर कई बड़ी-बड़ी प्लेट्स होती हैं, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये प्लेट्स लगातार धीरे-धीरे हिलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के खिलाफ रगड़ खाती हैं, तो अचानक ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में बाहर आती है। इसी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में, खासकर पहाड़ी इलाकों में, भूकंप ज्यादा आते हैं।

भारत में भूकंप के जोन
वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत का लगभग 59% हिस्सा भूकंप के खतरे वाले क्षेत्र में आता है। देश को भूकंप के आधार पर 4 जोन में बांटा गया है।

  • जोन-2: सबसे कम खतरे वाला क्षेत्र

  • जोन-3: मध्यम खतरा

  • जोन-4: अधिक खतरा

  • जोन-5: सबसे ज्यादा खतरा

देश की राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां तेज भूकंप आने की संभावना रहती है। भारत में हिमालय क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों और कच्छ जैसे इलाकों में भूकंप ज्यादा आते हैं, क्योंकि यहां भारतीय प्लेट, यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।

रिक्टर स्केल क्या बताता है?
भूकंप की ताकत को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से हम समझ सकते हैं कि भूकंप कितना खतरनाक हो सकता है।

  • 4.0 – 4.9: घर का सामान हिल सकता है या गिर सकता है

  • 5.0 – 5.9: भारी फर्नीचर भी हिल सकता है

  • 6.0 – 6.9: इमारतों में दरारें आ सकती हैं

  • 7.0 – 7.9: इमारतें गिर सकती हैं

  • 8.0 – 8.9: भारी तबाही और सुनामी का खतरा

  • 9.0 या उससे ज्यादा: बेहद विनाशकारी भूकंप

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