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कुर्बानी पर जो ज्ञान बांट रहे, वो पहले अपना फ्रिज देखें, ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के अलावा कोई विकल्प नहीं : मौलाना कारी इसहाक गोरा

June 3, 2025

कुर्बानी पर जो ज्ञान बांट रहे, वो पहले अपना फ्रिज देखें, ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के अलावा कोई विकल्प नहीं : मौलाना कारी इसहाक गोरा

Eid-ul-Adha : देवबंदी उलेमा और जमीयत दावतुल मुसलमीन के संरक्षक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने ईद-उल-अजहा के मौके पर अहम अपील की है। उन्होंने मुसलमानों को कुर्बानी के असली मकसद की याद दिलाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुर्बानी के खिलाफ मुहिम चलाने वालों को भी करारा जवाब दिया है।

ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के अलावा कोई विकल्प नहीं-
मौलाना कारी इसहाक गोरा ने साफ कहा कि जो लोग कहते हैं कि जानवर की कुर्बानी देने के बजाय कुछ और करना चाहिए, यानी केक काटना चाहिए, उन्हें समझ लेना चाहिए कि शरीयत में ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह इबादत है, कोई रस्म नहीं। अल्लाह की इबादत को किसी की जाति और सहूलियत से नहीं तौला जा सकता।

जो ज्ञान बांट रहे, वो पहले अपना फ्रिज देखें-
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग जानवरों की कुर्बानी के खिलाफ ज्ञान बांट रहे हैं, उन्हें पहले अपने फ्रिज में देखना चाहिए कि उसमें कितना मांस रखा है।

धार्मिक परंपराओं को निशाना बनाना खतरनाक-
मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने साफ शब्दों में कहा कि किसी धर्म विशेष की धार्मिक परंपराओं को निशाना बनाना सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक है। हमें अपने विवेक पर गौर करना चाहिए और दूसरों के धर्म का सम्मान करना चाहिए।

“कुर्बानी अल्लाह के लिए है, इंसानों को दिखाने के लिए नहीं”
अपने वीडियो संदेश में उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि कुर्बानी देने वाले हर मुसलमान को याद रखना चाहिए कि कुर्बानी फर्ज है, लेकिन स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जानवरों की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करना, सड़कों पर जानवरों को घुमाना और हंगामा करना शरीयत और संस्कृति दोनों के खिलाफ है। कुर्बानी अल्लाह के लिए है, इंसानों को दिखाने के लिए नहीं।

प्रतिबंधित जानवर की न हो कुर्बानी-
कारी साहब ने जोर देकर कहा कि कुर्बानी किसी प्रतिबंधित जानवर की नहीं होनी चाहिए और न ही बिना इजाजत के खुली जगह पर की जानी चाहिए। इसके अलावा, कुर्बानी के बाद जानवरों के अवशेषों को नगर पालिका या नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थान पर ही फेंकना चाहिए ताकि शहर की स्वच्छता बनी रहे।

अंत में उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा का संदेश त्याग, सादगी और अल्लाह की राह में सब कुछ कुर्बान करने का है। इस अवसर पर प्रत्येक मुसलमान को अपने कार्यों से यह साबित करना चाहिए कि इस्लाम प्रेम, स्वच्छता, शालीनता और न्याय का धर्म है।

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