नेशनल डेस्क: भारत की जन्म दर लगातार घट रही है, जिसे लेकर टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख CEO एलन मस्क ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि देश की प्रजनन दर अब उस स्तर से नीचे पहुंच गई है, जो किसी आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लंबे समय तक जारी रहा तो भविष्य में इसका असर देश की जनसंख्या संरचना और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर लिखा- भारत में शिक्षित वर्ग के बीच जन्म दर कई साल पहले ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे चली गई थी। अब पूरे देश की औसत प्रजनन दर भी इसी स्तर से नीचे पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) करीब 1.9 रह गई है। किसी देश की जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए यह दर लगभग 2.1 होनी चाहिए। इसे ही रिप्लेसमेंट लेवल कहा जाता है।
India’s birth rate has fallen below replacement.
Among those most educated, India’s birth rate fell below replacement many years ago. https://t.co/RsWf0PK6wx
— Elon Musk (@elonmusk) June 6, 2026
महानगरों में तेजी से घट रही है जन्म दर
विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के बड़े शहरों में जन्म दर में और अधिक गिरावट देखी जा रही है। राजधानी दिल्ली में यह दर लगभग 1.2 तक पहुंचने का दावा किया गया है, जो दुनिया के कई विकसित देशों के स्तर के बराबर या उससे भी कम मानी जाती है। उच्च शिक्षा, बढ़ती जीवन-यापन लागत, करियर को प्राथमिकता, देर से विवाह और बदलती जीवनशैली जैसे कारणों से शहरी परिवार पहले की तुलना में कम बच्चे पैदा कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने भी जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन 2025’ रिपोर्ट में भी भारत की प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाकर 1.9 रहने की बात कही गई है। भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब पहले की तुलना में काफी धीमी हो रही है।
भविष्य में क्या हो सकते हैं प्रभाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार घटती जन्म दर का असर आने वाले वर्षों में देश की कार्यशील आबादी, श्रम बाजार और सामाजिक व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। यदि युवाओं की संख्या कम होती है और बुजुर्गों की आबादी बढ़ती है, तो आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कम जन्म दर के पीछे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, महिलाओं की शिक्षा में बढ़ोतरी और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता जैसे सकारात्मक कारण भी शामिल हैं। इसके बावजूद देश में सामाजिक असमानता, बाल विवाह और महिलाओं से जुड़ी कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
बदल रही है भारत की जनसंख्या तस्वीर
वर्तमान में भारत की आबादी 1.46 अरब से अधिक है। जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत की जनसंख्या वृद्धि धीरे-धीरे स्थिर हो सकती है। ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं को रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की योजनाएं तैयार करनी होंगी।
मेष: दिन शुभ रहेगा...