अहमदगढ़: नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में अब भाषा चयन भी सफलता की रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। पहले जहां हिंदी, गुजराती, मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा देने वालों की संख्या दमदार थी, अब युवाओं का रु झान तेजी से अंग्रेजी की ओर बढ़ रहा है। क्षेत्रीय भाषाओं का ग्राफ नीचे आ गया है शिक्षकों की मानें तो पहले नोट्स, क्लास और गाइडैंस क्षेत्रीय भाषाओं में ही मिलता था, इसलिए छात्र अपनी मूल भाषा में ही नीट जैसी परीक्षाएं देते थे। लेकिन अब डिजीटल एजुकेशन और कोचिंग सैंटरों में अंग्रेजी कंटैंट की भरमार के चलते युवा भाषा बदलने में हिचक नहीं दिखा रहे।
एक छात्र ने कहा, की मेने 12वीं तक हिंदी माध्यम से पढ़ाई की, लेकिन नीट में अंग्रेजी चुनी क्योंकि ऑनलाइन मटीरियल और टैस्ट सीरीज उसी में बेहतर मिलती है।
क्यों बढ़ रही अंग्रेजी की ओर रु चि? के सवाल पर एसवीएम के डायरैक्टर डा. राहुल शर्मा ने बताया की एक तो अंग्रेजी में अधिक स्टडी मैटीरियल है, कोचिंग क्लासेस का माध्यम, ऑल इंडिया लेवल पर कॉम्पिटिशन, मैडीकल की उच्च शिक्षा भी अंग्रेजी में ही मिलती है। विशेषज्ञों की राय अनुसार अगर सरकार क्षेत्नीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रोत्साहन देना चाहती है, तो उसी स्तर का स्टडी मैटीरियल और गाइडैंस मुहैया कराना जरूरी है, वरना युवाओं का झुकाव केवल अंग्रेजी की ओर बना रहेगा।
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