Former woman sarpanch arrested : यमुनानगर। यहां का ‘ऊंचा चंदना विवाद’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पुलिस ने मारपीट के एक मामले में नामजद आरोपी और दौलतपुर मालियान की पूर्व महिला सरपंच पिंकी रानी को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी पर हाथ उठाने, सरकारी काम रुकवाने और जान से मारने की धमकी देने जैसी धाराओं में मामला दर्ज है।
थाना प्रभारी बोले- पुलिस कर रही अपना काम
थाना प्रभारी अजय ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए साफ किया है कि कानून अपना काम कर रहा है और मामले की तह तक जाने के लिए तफ्तीश जारी है। इस पूरे फसाद की पटकथा 11 दिसंबर 2025 को लिखी गई थी। उस दिन गांव ऊंचा चंदना में एक अहम बैठक बुलाई गई थी, जिसमें मंत्री पुत्र नेपाल राणा बतौर मुख्य अतिथि शामिल थे। इसी कार्यक्रम में हरियाणा राज्य आजीविका मिशन के खंड कार्यक्रम प्रबंधक (BPM) देवेंद्र राणा भी ‘नव निर्माण महिला क्लस्टर लेवल भवन’ के निर्माण से जुड़ा एक आधिकारिक प्रस्ताव पेश करने पहुंचे थे।
गालीगलौच और रास्ता रोकने का आरोप
देवेंद्र राणा का आरोप है कि बैठक के दौरान तत्कालीन सरपंच पिंकी रानी ने न सिर्फ उनका रास्ता रोका, बल्कि सरकारी काम में अड़ंगा डालते हुए उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पुलिस ने इस शिकायत पर लंबी प्राथमिक जांच के बाद 4 मार्च 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें अब यह गिरफ्तारी हुई है। हालांकि, इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जिसकी शुरुआत खुद पिंकी रानी की शिकायत से हुई थी। घटना वाले दिन पिंकी रानी ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि महिला मोर्चा की बैठक के दौरान देवेंद्र राणा बिना बुलाए अंदर घुस आए और स्वयं सहायता समूह के पैसों में हेराफेरी का आरोप लगाकर महिलाओं को प्रताड़ित करने लगे। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो देवेंद्र राणा ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, उनका गला दबाने की कोशिश की और जान से मारने की धमकी दी।
ये भी लगाया था आरोप
पूर्व सरपंच का तो यह भी आरोप था कि जब वह जान बचाकर छप्पर थाने पहुंचीं, तो देवेंद्र राणा अपने साथ आधा दर्जन साथियों (हरजीत कौर, रोमा, सुषमा, सुमन, प्रवीन सैनी और ममतेश) को लेकर थाने के भीतर ही आ धमका और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उन पर थप्पड़-मुक्कों से हमला कर दिया। मामले की संवेदनशीलता और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े होने के कारण पुलिस ने शुरुआत में मुस्तैदी दिखाते हुए देवेंद्र राणा समेत सात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने, मारपीट और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। यह मामला एक जनप्रनिधि और गंभीर धाराओं से जुड़ा था, इसलिए इसकी कमान उच्चाधिकारियों को सौंपी गई थी। इसके ठीक दो महीने बाद देवेंद्र राणा की शिकायत पर भी पूर्व सरपंच के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच यह कानूनी जंग लगातार खिंचती गई।
डीसी ने सरपंच को कर दिया था सस्पेंड
गिरफ्तार की गईं पिंकी रानी का विवादों से नाता नया नहीं है। चालू वर्ष 2026 के जनवरी महीने में ही यमुनानगर के उपायुक्त (DC) ने उन्हें सरपंच के पद से बर्खास्त कर दिया था। दरअसल, ग्रामीणों की शिकायत पर हुई एक उच्च स्तरीय जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि पिंकी रानी सरपंच चुने जाने के बाद भी ‘आशा वर्कर’ के पद पर गुपचुप तरीके से काम कर रही थीं। हद तो यह थी कि वह पंचायती राज के नियमों को ताक पर रखकर दोनों पदों का सरकारी मानदेय (सैलरी) डकार रही थीं। हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(3) के तहत हुई इस कार्रवाई से पहले उन्हें बकायदा कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन वह कोई संतोषजनक कानूनी दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रधानी गंवानी पड़ी थी।
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